
Iran on Trump 48 hours ultimatum: दुनिया इस वक्त बारूद के उस ढेर पर बैठी है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी महाविनाश का कारण बन सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग अब सीधे 'आर-पार' की लड़ाई में बदलती दिख रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी है कि अगर उसने समझौता नहीं किया, तो उस पर ऐसा 'कहर' बरसेगा जिसे इतिहास याद रखेगा। ट्रंप की इस धमकी के चंद घंटों के भीतर ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ऐसा पलटवार किया है, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट में खौफ पैदा कर दिया है। ईरान ने दोटूक कहा है कि अगर अमेरिका ने हिमाकत की, तो वह पूरे क्षेत्र को वाशिंगटन और इजरायल के लिए 'जीता-जागता नरक' बना देगा।
ट्रंप का 'ट्रुथ सोशल' पर धमाका: 48 घंटे और कहर!
डोनाल्ड ट्रंप अपने आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार उनका लहजा पहले से कहीं ज्यादा सख्त है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट लिखकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने लिखा, "याद रखिए, मैंने ईरान को 10 दिन का समय दिया था-या तो समझौता करो या होर्मुज की नाकेबंदी खोलो। अब समय रेत की तरह हाथ से फिसल रहा है। अगले 48 घंटों के बाद उन पर कहर टूटेगा।" ट्रंप का इशारा साफ है कि अगर ईरान ने दुनिया की तेल सप्लाई वाली लाइफलाइन 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को नहीं खोला, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों को मिट्टी में मिला देगा।
ईरान की 'नरक' वाली चेतावनी: दलदल में फंसेगा अमेरिका
ट्रंप की इस 'कहर' वाली धमकी पर ईरान के सैन्य मुख्यालय 'खातम अल-अनबिया' के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघारी ने जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को हराने का भ्रम अमेरिका और इजरायल को एक ऐसे दलदल में फंसा देगा जिससे वे कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे। जोल्फाघारी ने दावा किया कि ईरान के ड्रोन और मिसाइलें पहले ही इजरायली और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना चुकी हैं। ईरान का साफ संदेश है कि वह अपनी संप्रभुता और होर्मुज पर अपने नियंत्रण से समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए उसे पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में ही क्यों न झोंकना पड़े।
100 डॉलर के पार पहुंचा तेल: दुनिया में मची हाहाकार
28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है, वहां जारी तनाव के कारण ईंधन की कीमतें बेकाबू हो गई हैं। युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल 73 डॉलर प्रति बैरल पर था, जो अब उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। हालांकि, ईरान ने भारत जैसे कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है और शुक्रवार को एक फ्रांसीसी जहाज भी वहां से गुजरा, लेकिन मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से सामान्य आवाजाही अब भी ठप है।
क्या रुक पाएगी तबाही या शुरू होगा महाविनाश?
डोनाल्ड ट्रंप के बयान हर गुजरते दिन के साथ बदल रहे हैं। कभी वे कूटनीति की बात करते हैं, तो कभी ईरान को 'पत्थर युग' (स्टोन एज) में भेजने की धमकी देते हैं। दूसरी तरफ, ईरान अपनी सैन्य शक्ति के दम पर अमेरिका को चुनौती दे रहा है। अगले 48 घंटे इस युद्ध का भविष्य तय करेंगे। क्या ट्रंप अपनी धमकी के मुताबिक कहर बरपाएंगे या फिर पर्दे के पीछे कोई कूटनीतिक समझौता होगा? फिलहाल, मिडिल ईस्ट की हवाओं में सिर्फ बारूद की गंध है और दुनिया की निगाहें उन 48 घंटों पर टिकी हैं जो मानवता का भविष्य तय करने वाले हैं।
