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US-Iran Ceasefire: खुद मोजतबा खामेनेई ने कराया अमेरिका-ईरान युद्धविराम! जानें कैसे हुई डील?

Newstrack 6 days ago

US-Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद अब दो हफ्ते के संघर्ष विराम का ऐलान हो गया है। पिछले एक महीने से ज्यादा समय से दोनों देशों के बीच लगातार जंग चल रही थी, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया था।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को युद्धविराम के लिए डेडलाइन भी दी थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि डेडलाइन खत्म होने के महज 90 मिनट पहले ही दोनों देश समझौते पर सहमत हो गए। जिसके बाद ये दावा किया जा रहा है कि इस संघर्ष विराम में खुद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

क्या थी मोजतबा खामेनेई की भूमिका?

दावा किया जा रहा है कि मोजतबा खामेनेई के निर्देश पर ही ईरान ने युद्धविराम के लिए हामी भरी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद पहली बार मोजतबा खामेनेई ने अपने वार्ताकारों को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया। गौरतलब हो कि मोजतबा, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं। जिनके निधन के बाद मोजतबा को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में एक और रहस्य भी जुड़ा हुआ है। कुछ इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई युद्ध के शुरुआती दिनों में एक हमले में घायल हो गए थे और फिलहाल कोमा में हैं। ऐसे में उनके द्वारा लिए गए फैसलों को लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

होर्मुज से यातायात की गारंटी

संघर्ष विराम के बाद सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य का है। ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि इस दो हफ्ते के समझौते के तहत यहां से समुद्री यातायात की गारंटी दी जाएगी। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया के तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम मानी जाती है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि जहाजों की आवाजाही ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से और तकनीकी सीमाओं का ध्यान रखते हुए सुनिश्चित की जाएगी। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कुछ राहत देखने को मिली है।

अमेरिका ने बताया अपनी जीत

वहीं अमेरिका की तरफ से इस समझौते को बड़ी सफलता के रूप में पेश किया जा रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने इसे अमेरिका की जीत करार दिया है। उनका कहना है कि अमेरिकी सेना की मजबूती और रणनीति के कारण ही अमेरिका बातचीत में मजबूत स्थिति में पहुंचा, जिससे सख्त शर्तों वाला समझौता संभव हो पाया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते के बाद अब कूटनीतिक समाधान और लंबे समय तक शांति की दिशा में रास्ता खुल गया है। हालांकि जमीनी हालात और अलग-अलग दावों को देखते हुए यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि यह शांति कितनी स्थायी साबित होगी।

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