Vaishakh Purnima 2026 Date Time: हिन्दू धर्म मे वैशाख पूर्णिमा शुभ दिन है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती जाती है। वैशाख पूर्णिमा को सत्य विनायक पुर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु का तेइसवां अवतार महात्मा बुद्ध के रूप में हुआ था। इसलिए वैसाख पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है।
वैशाख पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा-पाठ आदि करने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान की पूजा आराधना करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। और उसके भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान धर्मराज की पूजा करने का विधान है। इसलिए इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
वैशाख पूर्णिमा को धर्म, दान और भक्ति का संगम माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जानते हैं साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले खास उपाय।
वैशाख पूर्णिमा 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वैशाख पूर्णिमा मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत 1 मई, शुक्रवार को रखा जाएगा।
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 अप्रैल 2026, रात 09:15 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 1 मई 2026, रात 10:55 बजे
उदय तिथि के आधार पर 1 मई को ही व्रत और पूजा करना शुभ रहेगा।
वैशाख पूर्णिमा पूजा विधि
वैशाख पूर्णिमा के दिन सूबह प्रातःकाल जल्दी उठे
नित्य क्रिया से निवृत्त होकर किसी भी पवित्र नदी, सरोवर, कुंड, तालाब आफ में स्नान करें।
यदि ऐसा करना सम्भव ना हो तो घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान करके साफ शुद्ध कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प ले।
इसके बाद पूजा स्थल को अच्छे से साफ-सफाई करके पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा विछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या फोटो स्थापति करे।
इसके बाद भगवान विष्णु के समीप धूप, दीप जलाये। इसके बाद भगवान विष्णु जी को तुलसी दल अर्पित करे।
इसके बाद कनकधारा स्तोत्र और विष्णु मंत्रों का जाप करें। इसके बाद भगवान सत्यनारायण की पूजा करके व्रत कथा का पाठ करे।
पूजा के अंत में आरती करके खीर का भोग लगाएं। और रात्रि में चंद्रदेव को अर्य देकर व्रत पूरा करे। हो सके तो पूरी रात्रि भजन कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करे।
वैशाख पूर्णिमा व्रत उपाय
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां लक्ष्मी के मंदिर में झाड़ू का दान करें। मान्यता है कि इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन का आगमन बढ़ता है।
माता लक्ष्मी को 11 पीली कौड़ियां अर्पित करें। अगले दिन इन कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। इससे धन वृद्धि के योग बनते हैं।
खीर का भोग लगाकर इसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटें। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
इस दिन "ॐ श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः" मंत्र का जाप करें। यह मंत्र आर्थिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
पीपल के वृक्ष की पूजा करें। उसे जल, दूध और घी अर्पित करें तथा 108 बार परिक्रमा करें। इसके बाद दीपक जलाकर धन-वैभव की प्रार्थना करें।
वैशाख पूर्णिमा को पुण्य फल देने वाली तिथि माना गया है। इस दिन किया गया दान, जप और तप कई गुना फल देता है। साथ ही, यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए सत्कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
नोट : ये जानकारियां धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं। Newstrack.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।इसे सामान्य रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है

