UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पिछले कई दिनों से इस फेरबदल की चर्चाएं चल रही थीं और माना जा रहा था कि खरमास के बाद कभी भी विस्तार हो सकता है।
अब ताजा संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस कैबिनेट विस्तार में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, वहीं कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है। इसके अलावा कई विभागों में भी बदलाव संभव है। भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में कुछ अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
पिछले कुछ दिनों में लखनऊ से लेकर नई दिल्ली तक कई अहम बैठकें हुई हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े भी लखनऊ पहुंचे और कई नेताओं से मुलाकात की। वहीं राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री भी दिल्ली जाकर शीर्ष नेतृत्व से चर्चा कर चुके हैं। इस पूरे मंथन में संघ और भाजपा के बीच समन्वय बनाने वाले अरुण कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद पर पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद अब कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, इस बार किसी वरिष्ठ ब्राह्मण नेता को मंत्रिमंडल में प्रमुख स्थान दिया जा सकता है। फिलहाल ब्राह्मण चेहरे के रूप में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक हैं, जबकि जितिन प्रसाद अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं। ऐसे में ब्राह्मण समुदाय को साधने के लिए नया चेहरा सामने आ सकता है।
इसके अलावा दलित और महिला प्रतिनिधित्व पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। विपक्ष, खासकर अखिलेश यादव लगातार सामाजिक समीकरणों को लेकर भाजपा पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में भाजपा दलित वर्ग से किसी नेता को मौका देकर संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है। महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा है कि किसी महिला को मंत्री बनाया जा सकता है, जिससे राजनीतिक संदेश दिया जा सके। ओबीसी वर्ग की बात करें तो भूपेंद्र चौधरी का नाम काफी मजबूत माना जा रहा है। जाट समुदाय से आने वाले भूपेंद्र चौधरी को मंत्री बनाकर भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना आधार मजबूत करने की रणनीति अपना सकती है। फिलहाल राज्य के शीर्ष नेतृत्व में पश्चिम यूपी का प्रतिनिधित्व सीमित है, ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन भी इस विस्तार का अहम हिस्सा होगा।

