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बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में गिरावट, एनएमसी हेल्थ समझौते का असर

बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में गिरावट, एनएमसी हेल्थ समझौते का असर

Newz Fatafat 2 weeks ago

शेयर बाजार में बैंकिंग क्षेत्र की शुरुआत

शुक्रवार को शेयर बाजार में बैंकिंग क्षेत्र ने कुछ दबाव के साथ शुरुआत की, जिसका सबसे अधिक प्रभाव बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों पर पड़ा। एनएमसी हेल्थ मामले में 60 करोड़ डॉलर के समझौते की घोषणा के बाद निवेशकों के बीच चिंता बनी हुई है।

सुबह के कारोबार में बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर लगभग 4 प्रतिशत गिरकर 250 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जिससे यह निफ्टी 500 के सबसे अधिक नुकसान वाले शेयरों में शामिल हो गया।

बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में गिरावट

इस वर्ष अब तक बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में लगभग 16.7 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 इंडेक्स में लगभग 7 प्रतिशत की कमी आई है। यह दर्शाता है कि बैंक के शेयरों पर बाजार का दबाव सामान्य बाजार की तुलना में अधिक है।

सरकारी बैंकिंग क्षेत्र पर असर

बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में कमजोरी ने पूरे सरकारी बैंकिंग क्षेत्र को प्रभावित किया। शुक्रवार सुबह निफ्टी सरकारी बैंक इंडेक्स सबसे कमजोर क्षेत्रीय इंडेक्स बनकर उभरा। दूसरी ओर, व्यापक शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। सुबह करीब 9:59 बजे सेंसेक्स लगभग 485 अंक की बढ़त के साथ 77,987.13 अंक पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 164 अंक चढ़कर 24,339.35 अंक पर पहुंच गया था।

बाजार में खरीदारी का रुख

कुल मिलाकर बाजार में खरीदारी का रुख बना रहा, जिसमें लगभग 2,016 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1,256 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। इसके बावजूद सरकारी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी सरकारी बैंक इंडेक्स लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि निजी बैंक इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।

अन्य सरकारी बैंकों के शेयरों में गिरावट

बैंक ऑफ बड़ौदा के अलावा, कई अन्य सरकारी बैंकों के शेयरों में भी गिरावट आई। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में 4 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई। पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि, यूको बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई।

एनएमसी हेल्थ समझौता

हाल ही में बैंक ऑफ बड़ौदा ने एनएमसी हेल्थ पीएलसी और संबंधित कंपनियों के साथ अदालत के बाहर समझौता करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत बैंक लगभग 60 करोड़ डॉलर का भुगतान करेगा। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार किए बिना किया गया है और इसका उद्देश्य लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को समाप्त करना है।

एनएमसी हेल्थ का मामला

एनएमसी हेल्थ का मामला 2020 में सामने आया था, जब कंपनी में वित्तीय अनियमितताओं और छिपे हुए कर्ज का खुलासा हुआ। इसके बाद कई देशों में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और विभिन्न बैंकों के खिलाफ दावे किए गए। बैंक ऑफ बड़ौदा भी इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा था।

विशेषज्ञों की राय

वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भविष्य में कानूनी अनिश्चितता को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, आपात स्थिति में इसका असर बैंक के वित्तीय परिणामों पर पड़ सकता है। ब्रोकरेज संस्था ने बैंक के शेयर पर तटस्थ रुख बनाए रखते हुए 300 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय किया है।

समझौते का प्रभाव

संस्थान का कहना है कि समझौते की राशि बैंक की कुल संपत्ति का लगभग 4 प्रतिशत है। यदि इस राशि के लिए पहले से पर्याप्त प्रावधान नहीं किया गया है, तो इसका असर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजों पर दिखाई दे सकता है। वर्तमान में निवेशकों की नजर बैंक के आगामी वित्तीय परिणामों और प्रबंधन की आगे की रणनीति पर है।


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