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भारत सरकार का ऐतिहासिक कदम: रसोई गैस की सप्लाई को सुरक्षित बनाने की योजना

भारत सरकार का ऐतिहासिक कदम: रसोई गैस की सप्लाई को सुरक्षित बनाने की योजना

Newz Fatafat 1 week ago

ई दिल्ली में रसोई गैस की सप्लाई को सुरक्षित करने की पहल

नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को और अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की योजना बनाई है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों की असुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सरकारी तेल कंपनियां अमेरिका से एलपीजी की खरीद को मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना करने की तैयारी कर रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम करना है, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान आम नागरिकों को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

अमेरिका से एलपीजी खरीद में वृद्धि

वर्तमान में, भारत हर साल अमेरिका से लगभग 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) एलपीजी खरीदता है, जिसे अब दोगुना करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार अल्जीरिया जैसे अन्य देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रही है। इस साल पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-इजरायल के बीच घटनाक्रम के कारण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से गुजरने वाले कई एलपीजी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इस दौरान रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि गल्फ देशों के अलावा अन्य देशों में बड़े पैमाने पर एलपीजी का उत्पादन नहीं होता है। ऐसे समय में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वैकल्पिक सप्लायर बनकर उभरा और उसने निरंतर गैस की आपूर्ति की।

अमेरिकी गैस की हिस्सेदारी में वृद्धि

आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8% से कम थी, लेकिन नवंबर 2025 में एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद यह तेजी से बढ़ने लगी। जनवरी 2026 में अमेरिकी गैस की हिस्सेदारी 12% और फरवरी में 13% हो गई। इसके बाद मार्च में यह 37%, अप्रैल में 40%, मई में 55% और जून में रिकॉर्ड 65% तक पहुंच गई। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अमेरिका की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा, भारत ने अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से भी गैस खरीदकर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत किया है।

आपात स्थिति के लिए रणनीतिक रिजर्व

सरकार की यह योजना केवल आयात के स्रोत बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों को 30 दिनों का 'स्ट्रेटजिक एलपीजी रिजर्व' तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब यह है कि यदि भविष्य में किसी युद्ध, प्रतिबंध या समुद्री संकट के कारण आयात में रुकावट आती है, तो भी देश के भीतर कम से कम एक महीने तक रसोई गैस की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। यह नया रिजर्व पहले से मौजूद 45 दिनों के सामान्य स्टॉक के अतिरिक्त होगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।


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