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हंटावायरस: जानें इसके लक्षण, कारण और उपचार

हंटावायरस: जानें इसके लक्षण, कारण और उपचार

Newz Fatafat 4 days ago

हंटावायरस से जुड़ी चिंताजनक जानकारी

ई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में एक गंभीर सूचना साझा की है। संगठन ने बताया कि अटलांटिक महासागर में एक क्रूज पर हंटावायरस के कारण तीन व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है।

इसके अलावा, एक यात्री की स्थिति गंभीर है और उसे दक्षिण अफ्रीका के एक अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इस बीमारी के एक मामले की पुष्टि भी की गई है। एमवी होंडियस (MV Hondius) पर यात्रा कर रहे अन्य पांच यात्रियों की भी स्वास्थ्य जांच की जा रही है।

हंटावायरस क्या है?

हंटावायरस एक गंभीर और खतरनाक बीमारी है, जिसमें उच्च बुखार, रक्तस्राव और मृत्यु का खतरा होता है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों से फैलता है। इसके संक्रमण का मुख्य कारण जानवरों के मल-मूत्र के संपर्क में आना है। हालांकि, यह आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता, लेकिन गंभीर परिस्थितियों में यह संक्रामक हो सकता है। हर साल दुनिया भर में हंटावायरस के लगभग 1.5 से 2 लाख मामले सामने आते हैं, लेकिन यह कोविड और इन्फ्लूएंजा जैसे अन्य वायरस की तुलना में कम संक्रामक है।

हंटावायरस के जानलेवा प्रभाव

हंटावायरस एक अत्यंत खतरनाक वायरस है, जिसके दो प्रमुख प्रकार हैं, और दोनों के लक्षण भिन्न होते हैं।


हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम: यह वायरस फेफड़ों को प्रभावित करता है और मुख्य रूप से अमेरिका में पाया जाता है। संक्रमित व्यक्ति को कुछ दिनों में खांसी और सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद थकान, मांसपेशियों में दर्द और बुखार जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं। इस वायरस से संक्रमित 38 प्रतिशत लोग मृत्यु का शिकार हो जाते हैं।


हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम: यह वेरियंट मुख्य रूप से यूरोप और एशिया में पाया जाता है। इसका एक प्रकार, जिसे 'सियोल वायरस' कहा जाता है, विश्वभर में फैल चुका है। यह वायरस किडनी पर हमला करता है और इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमण के दो हफ्ते के भीतर प्रकट होते हैं। प्रारंभिक लक्षणों में तेज सिरदर्द, पेट दर्द और जी मिचलाना शामिल हैं। यह बीमारी 1 से 15 प्रतिशत मामलों में मृत्यु का कारण बन सकती है।

हंटावायरस का उपचार

दुर्भाग्यवश, हंटावायरस के किसी भी प्रकार के लिए कोई विशेष उपचार या दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, प्रारंभिक उपचार से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। इसमें रेस्पिरेटर, ऑक्सीजन थेरेपी और डायलिसिस का उपयोग किया जाता है।


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