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ईरान ने होरमुज समुद्री रास्‍ता किया बंद, दागी मिसाइलें, क्यों पूरी दुनिया के लिए अहम हैं ये Sea ​​route

ईरान ने होरमुज समुद्री रास्‍ता किया बंद, दागी मिसाइलें, क्यों पूरी दुनिया के लिए अहम हैं ये Sea ​​route

OneIndia 1 month ago

रान ने 17 फरवरी (मंगलवार) को अपनी तथाकथित 'दोहरी रणनीति' का प्रदर्शन किया। एक ओर वह जिनेवा में अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दों पर कूटनीतिक बातचीत कर रहा है वहीं दूसरी ओर उसने स्ट्रेट ऑफ होरमुज (Strait of Hormuz) में लाइव फायरिंग सैन्य अभ्यास कर दुनिया भर को अपनी ताकत का प्रमाण देकर मैसेज दिया कि वो जब चाहे ये होरमुज में विदेशी जहाजों की अवाजाही पूरी तरह से बंद कर सकता है।

हालांकि मंगलवार को ईरान ने इस सैन्‍य अभ्‍यास से पहले ये कहा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के कुछ हिस्सों को सुरक्षा कारणों से कुछ घंटों के लिए बंद करेगा। उसने कहा कि यह निर्णय अपने सैन्य अभ्यास के कारण लिया, ताकि नौसैनिक अभ्यास के दौरान व्यापारिक जहाजों और समुद्री यातायात की सुरक्षा बनी रहे।

हालांकि ईरान ने इस जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद किया लेकिन उसने जता दिया कि कि ईरान जब चाहे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को प्रभावित या नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। जानिए आखिर ये मार्ग क्‍यों दुनिया भर के लिए इतना महत्‍वपूर्ण है?

स्ट्रेट ऑफ होरमुज सम्रुदी रास्‍ता क्‍यों है इतना अहम?

स्ट्रेट ऑफ होरमुज को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम "चोक पॉइंट" माना जाता है। यह जलडमरूमध्य Persian Gulf को Gulf of Oman से जोड़ता है और भौगोलिक रूप से Iran तथा Oman के बीच स्थित है। इसकी सबसे संकरी चौड़ाई लगभग 21 मील (करीब 33-34 किलोमीटर) है, लेकिन इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्व अत्यंत विशाल है।

तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है

आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। प्रतिदिन औसतन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं। यही कारण है कि इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या अवरोध वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।

ईरान पहले भी समुद्री मार्ग बंद करने की दे चुका है चेतावनी

साल 2000 के बाद से ईरान कई अवसरों पर इस अहम समुद्री मार्ग को बंद करने की चेतावनी दे चुका है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसी घोषणाएं दस से अधिक बार की जा चुकी हैं, विशेषकर तब जब उसका टकराव पश्चिमी देशों-खासकर United States और Israel-के साथ तेज हुआ।

आम तौर पर इन बयानों को प्रत्यक्ष कार्रवाई से ज्यादा कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जाता है। अब तक ईरान ने इस जलडमरूमध्य को वास्तव में पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन उसकी चेतावनियां वैश्विक ऊर्जा बाजार में हर बार चिंता जरूर बढ़ा देती हैं।

Bhavna Pandey Oneindia

source: oneindia.com

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