Tuesday, 14 Aug, 4.05 am ओनली न्यूज़24

उत्तराखंड
शौर्य गाथा: 1824 में आज़ादी की पहली लड़ाई में कुंजा बना 'कुंजा बहादुरपुर'

रूडकी। 3 अक्टूबर 1824 को सहारनपुर-हरिद्वार के कुंजा की क्षेत्र में स्वतन्त्रता-संग्राम की ज्वाला बहुत प्रचंड थी। आधुनिक हरिद्वार जनपद में रूडकी शहर के पूर्व में लंढौरा नाम का एक कस्बा है जो 1947 तक पंवारवंश के राजाओं की राजधानी था । तब लंढौरा रियासत में 804 गाँव थे और यहां के शासको का प्रभाव समूचे पश्चिम उत्तर प्रदेश में था। हरियाणा के करनाल क्षेत्र और गढ़वाल में भी इस वंश के शासकों का व्यापक प्रभाव था।
1803 में अंग्रेजों ने ग्वालियर के सिन्धियाओं को परास्त कर समस्त उत्तर प्रदेश को उनसे युद्व हर्जाने के रूप में प्राप्त किया था । तब पंवार वंश की लंढौरा, नागर वंश की बहसूमा , भाटी वंश की दादरी व जाटो की कुचेसर आादि ताकतवर रियासतें अंग्रेजो की आँखों में कांटे की तरह चुभने लगी थी। 1813 में लंढौरा के राजा रामदयाल सिंह की मृत्यु ने पर उत्तराधिकारी के प्रश्न पर राज परिवार में गहरे मतभेद उत्पन्न हो गये थे । इस स्थिति का लाभ उठाकर अंग्रेजों ने रियासत को भिन्न दावेदारों में बांट दिया और एक बड़े हिस्से को अपने राज्य में मिला लिया।
उस समय लंढौरा रियासत का ही एक ताल्लुका था, सहारनपुर-रूड़की मार्ग पर भगवानपुर के निकट स्थित कुंजा-बहादुरपुर , तब इस ताल्लुके मे 44 गाँव थे सन् 1819 में विजय सिंह यहां के ताल्लुकेदार बने। लंढौरा राज परिवार के निकट सम्बन्धी व साम्राज्यवाद के विरोधी विजय सिंह के मन में अंग्रेजो के विरूद्व बहुत आक्रोश था। वह लंढौरा रियासत के विभाजन को मन से स्वीकार नहीं कर पाए।

उधर क्षेत्र के किसानों को शासन कई वर्षों के सूखे के बाद भी बढते राजस्व चूकता करने को सता रहा था जिसने उन्हे संगठित विद्रोह करने के लिए मजबूर कर दिया। अपने विरूद्व खडे इन संगठनों को अंग्र्रेज डकैतो का गिरोह कहते थे। लेकिन इन्हंे जनता का भरपूर समर्थन प्राप्त था । इन संगठनों में एक क्रान्तिकारी संगठन का प्रमुख नेता कल्याण सिंह उर्फ कलुआ गुर्जर था । देहरादून क्षेत्र में उसने अंग्रेजी राज्य की चूलंे हिला रखी थी । दूसरे संगठन के प्रमुख कुंवर गुर्जर और भूरे गुर्जर थें। जो तब के सहारनपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। इस प्रकार सहारनपुर-हरिद्वार-देहरादून क्षेत्र क्रांति का मंच बन चुका था।
ताल्लुकेदार विजय सिंह स्थिति पर नजर रखे हुए थे उन्होने अपनी पहल कर पश्चिम उत्तर प्रदेश के सभी अंग्रेज विरोधी जमीदारों, ताल्लुकेदारों, मुखियाओं, क्रान्तिकारी संगठनों से सम्पर्क स्थापित किया और एक सशस्त्र क्रान्ति के माध्यम से अंग्रेजों को खदेड देने की योजना उनके समक्ष रखी। विजयसिंह के आह्वान पर ब्रिटिश किसानों की एक आम सभा सहारनपुर के भगवानपुर में हुई जिसमें सहारनपुर हरिद्वार, देहरादून-मुरादाबाद, मेरठ और यमुनापार हरियाणा के किसानों ने भाग लिया। सभा में उपस्थित किसानों ने विजय सिंह की क्रान्तिकारी योजना को स्वीकार कर लिया और उनसे ही भावी मुक्ति संग्राम के नेतृत्व का आग्रह किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

कल्याण सिंह उर्फ कलुआ गुर्जर ने विजय सिंह के साथ मिलकर विजय सिंह अंग्रेजों से दो-दो हाथ करने का फैसला किया । अब वें किसी अच्छे अवसर की ताक में थे। 1824 में बर्मा के युद्व में अंग्रेजो की हार व बैरकपुर में अंग्रेजी सरकार के विरूद्व विद्रोह ने विजय सिंह के मन में उत्साह पैदा किया और समय को अनुकूल मान क्षेत्रीय किसानों ने स्वतन्त्रता की घोषणा भी कर दी। इस स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक दौर देहरादून क्षेत्र में सक्रिय कल्याण सिंह ने शिवालिक की पहाडियों में अच्छा प्रभाव स्थापित कर लिया। उसने नवादा गाँव के शेखजमां और सैयाजमां (जो अंग्रेजो के खास मुखबिर थे, और क्रान्तिकारियों की गतिविधियों की गुप्त सूचना अंग्रेजो को देते रहते थे।) आक्रमण कर इन गददारों की सम्पत्ति जब्त कर ली। इस घटना ने अंग्रजों के लिये चेतावनी का कार्य किया पर वें कुछ प् कर पाए ।
30 मई 1824 को कल्याण सिंह , रायपुर ग्राम से अंग्रेज परस्त गद्दारों को पकड़ कर देहरादून ले गया तथा देहरादून के जिला मुख्यालय के निकट उन्हें कडी सजा दी। कल्याण सिंह के इस चुनौती पूर्ण व्यवहार से सहायक मजिस्ट्रेट शोर बुरी तरह बौखला गया स्थिति की गम्भीरता को देखते हुये उसने सिरमोर बटालियन बुला ली। कल्याण सिंह के फौजी दस्ते की ताकत सिरमौर बटालियन से काफी कम थी अतः कल्याण सिंह ने देहरादून क्षेत्र छोड दिया, और उसके स्थान पर सहारनपुर, ज्वालापुर और करतापुर को अपनी क्रान्तिकारी गतिविधियों का केन्द्र बनाया। उसने 7 सितम्बर सन 1824 को करतापुर पुलिस चैकी को नष्ट कर हथियार लूट लिये। पांच दिन बाद उसने पर आक्रमण कर भगवानपुर जीत लिया। सहारनपुर के ज्वाइन्ट मजिस्ट्रेट ग्रिन्डल ने घटना की जांच के आदेश कर दिये। जांच में क्रान्तिकारी गतिविधियों के कुंजा के किले से संचालित होने के तथ्य प्रकाश में आये तो ग्रिन्डल ने विजय सिंह के नाम सम्मन जारी कर दिया, जिसे अनदेख कर विजयसिंह ने निर्णायक युद्व की तैयारी आरम्भ कर दी।
एक अक्टूबर 1824 को आधुनिक शस्त्रों से सुसज्जित 200 पुलिस रक्षकों की कडी सुरक्षा में सरकारी खजाना ज्वालापुर से सहारनपुर जा रहा था। कल्याण सिंह के नेतृत्व में क्रान्तिकारियों ने काला हाथा नामक स्थान पर इस पुलिस दल पर हमला कर खजाना लूट लिया और विजय सिंह के साथ मिलकर स्वदेशी राज्य की घोषणा कर दी और अपने नये राज्य को स्थिर करने के लिए अनेक फरमान जारी किये।
रायपुर सहित बहुत से गाँवो ने विजयसिंह को राजस्व देना स्वीकार कर लिया अब तो चारों ओर आजादी की हवा चलने लगी और अंग्रेजी राज्य इस क्षेत्र से सिमटता प्रतीत होने लगा। कल्याण सिंह ने स्वतन्त्रता संग्राम को नवीन शक्ति प्रदान करने के उददेश्य से सहारनपुर जेल में बन्द स्वतन्त्रता सेनानियों व सहारनपुर शहर को जेल तोडकर मुक्त करने की योजना बनायी।
क्रान्तिकारियों की इस कार्य योजना से अंग्रेजी प्रशासन चिन्तित हो उठा, और बाहर से भारी सेना बुला ली गयी। कैप्टन यंग को ब्रिटिश सेना की कमान सौपी गयी। जल्द ही अंग्रेजी सेना ही कुंजा के निकट सिकन्दरपुर पहुँच गयी। राजा विजय सिंह ने किले के भीतर और कल्याण सिंह ने किले के बाहर मोर्चा सम्भाला। किले में भारतीयों के पास दो तोपंे थी। कैप्टन यंग के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना जिसमें मुख्यतः गोरखे थे, कुंजा के काफी निकट आ चुकी थी।
03 अक्टूबर को ब्रिटिश सेना ने अचानक हमला कर दिया। भारतीयों ने स्थिति पर नियन्त्रण पाते हुए जमीन पर लेटकर मोर्चा सम्भाल, जवाबी कार्यवाही शुरू कर दी। भयंकर युद्ध छिड गया, दुर्भाग्यवश इस संघर्ष में लडने वाले स्वतन्त्रता सेनानियों का सबसे बहादुर योद्वा कल्याण सिंह अंग्रेजों के इस पहले ही हमले मे शहीद हो गया पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुंजा में लडे जा रहे स्वतन्त्रता संग्राम का समाचार जंगल की आग के तरह फैल गया ।

उधर बहसूमा और दादरी रियासत के राजा भी अपनी सेनाओं के साथ गुप्त रूप से कुंजा के लिए कूच कर गये। बागपत और मुजफ्फरनगर के आस-पास बसे चैहान गोत्र के कल्सियान किसान भी भारी मात्रा में इस स्वतन्त्रता संग्राम में राजा विजययसिंह की मदद के लिये निकल पडे। अंग्रेजोको जब इस हलचल का पता लगा तो उनके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गयी। उन्होने बडी चालाकी से कार्य किया और कल्याण सिंह के मारे जाने का समाचार पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैला दिया। साथ ही कुंजा के किले के पतन और स्वतन्त्रता सैनानियों की हार की झूठी अफवाह भी उडा दी। अंग्रेजों की चाल सफल रही। अफवाहों से प्रभावित होकर अन्य क्षेत्रों से आने वाले स्वतन्त्रता सेनानी हतोत्साहित और निराश होकर अपने क्षेत्रों को लौट गये।
तब अंग्रेजों ने बमबारी से किले को उडाने का प्रयास किया। किले की दीवार कच्ची मिटटी की बनी थी जिस पर तोप के गोले विशेष प्रभाव न डाल सकें। परन्तु अन्त में तोप से किले के दरवाजे को तोड गोरखा सेना किले में घुसने में सफल हो गयी। दोनों ओर से भीषण युद्व हुआ। सहायक मजिस्ट्रेट मि0 शोर युद्ध में बुरी तरह से घायल हो गया। परन्तु विजय श्री अन्ततः अंग्रेजों को प्राप्त हुई। राजा विजय सिंह बहादुरी से लडते हुए शहीद हो गये।
भारतीयों की हार की वजह मुख्यतः आधुनिक हथियारों की कमी थी, वे अधिकांशतः तलवार, भाले बन्दूकों जैसे हथियारों से लडे। जबकि ब्रिटिश सेना के पास 303 बोर आधुनिक रायफल और कारबाइने थी। इस पर भी भारतीय बडी बहादुरी से लडे, और उन्होनें आखिरी सांस तक अंग्रेजो का मुकाबला किया। ब्रिटिश सरकार के आंकडों के अनुसार 152 स्वतन्त्रता सेनानी शहीद हुए, 129 जख्मी हुए और 40 गिरफ्तार किये गये। लेकिन वास्तविकता में शहीदों की संख्या काफी अधिक थी। भारतीय क्रान्तिकारियों की शहादत से भी अंग्रेजी सेना का दिल नहीं भरा। और युद्व के बाद उन्होने कंुजा के किले की दीवारों को भी गिरा दिया। ब्रिटिश सेना विजय उत्सव मनाती हुई देहरादून पहुँची, वह अपने साथ क्रान्तिकारियों की दो तोपें, कल्याण सिंह का सिर औेर विजय सिंह का वक्षस्थल भी ले गये। ये तोपें देहरादून के परेडस्थल पर रख दी गयी। भारतीयों को आंतकित करने के लिए राजा विजय सिंह का वक्षस्थल और कल्याणसिंह का सिर एक लोहे के पिंजरे में रखकर देहरादून जेल के फाटक पर लटका दिया। कल्याण सिंह के युद्ध की प्रारम्भिक अवस्था में ही शहादत के कारण क्रान्ति अपने शैशव काल में ही समाप्त हो गयी। कैप्टन यंग ने कुंजा के युद्व के बाद स्वीकार किया था कि यदि इस विद्रोह को तीव्र गति से न कुचला गया होता, तो दो दिन के समय में ही इस युद्व को हजारों अन्य लोगों का समर्थन प्राप्त हो जाता। और यह विद्रोह समस्त पश्चिम उत्तर प्रदेश में फैल जाता।

Dailyhunt
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Dailyhunt. Publisher: Only News 24
Top