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अडानी ने रेटिंग एजेंसियों से इंफ्रा के लिए नया क्रेडिट फ्रेमवर्क बनाने की अपील की, कहा- खावड़ा, मुंद्रा और विझिंजम जैसे प्रोजेक्ट्स लाते हैं अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव

 अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने मुंबई में CareEdge के वार्षिक सम्मेलन ‘Infrastructure Landscape: Vision for Viksit Bharat’ को संबोधित करते हुए क्रेडिट एजेंसियों से बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए दुनिया का पहला व्यापक विश्लेषणात्मक ढाँचा विकसित करने (new credit framework to assess integrated platform infrastructure) की अपील की।
अडानी ने कहा कि भारत […]

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने मुंबई में CareEdge के वार्षिक सम्मेलन ‘Infrastructure Landscape: Vision for Viksit Bharat’ को संबोधित करते हुए क्रेडिट एजेंसियों से बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए दुनिया का पहला व्यापक विश्लेषणात्मक ढाँचा विकसित करने (new credit framework to assess integrated platform infrastructure) की अपील की।

अडानी ने कहा कि भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर अब सिर्फ अलग-अलग प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है। पोर्ट, रेल, लॉजिस्टिक्स, पावर, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सिस्टम एक-दूसरे से जुड़कर बड़े इकोसिस्टम बना रहे हैं। ऐसे में पुराने क्रेडिट मॉडल, जो किसी एक एसेट के नकदी प्रवाह पर ज्यादा ध्यान देते हैं वो इनकी पूरी क्षमता को नहीं आँक पाते।

उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर को तीन हिस्सों में समझाया। पहला, मौजूदा सुविधाओं को बदलने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर, जहाँ पुराने मॉडल प्रभावी हैं। दूसरा, ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर, जहाँ आसपास की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर को भी देखना जरूरी है। तीसरा, प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर, जहाँ कई सेक्टर मिलकर नई माँग और नई क्षमताएँ पैदा करते हैं।

उन्होंने कहा कि खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क और मुंद्रा व विझिंजम पोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट केवल क्षमता का निर्माण नहीं करते बल्कि आसपास की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हैं। अडानी ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि यह केवल एक पोर्ट नहीं रहा बल्कि रेल, लॉजिस्टिक्स, पावर और उद्योगों से जुड़ा बड़ा नेटवर्क बन चुका है। वहीं, केरल का विझिंजम पोर्ट भारत की ट्रांसशिपमेंट के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक मजबूती बढ़ाने की क्षमता रखता है।

उन्होंने खावड़ा के 30 गीगावाट के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट को भी इसी बदलाव का उदाहरण बताया, जहाँ ऊर्जा, AI, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एक साथ जुड़ रहे हैं। AI के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए अडानी ने कहा कि भविष्य में सिर्फ बेहतर सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम ही पर्याप्त नहीं होंगे। बड़े पैमाने पर AI के लिए डेटा सेंटर, कूलिंग, ट्रांसमिशन और भरोसेमंद स्वच्छ ऊर्जा जैसी सुविधाएँ भी जरूरी होंगी।

उन्होंने कहा कि भारत को रेटिंग के मानक कम करने की जरूरत नहीं है बल्कि ऐसे मॉडल की जरूरत है जो इकोसिस्टम से पैदा होने वाली अतिरिक्त वैल्यू और देश की रणनीतिक मजबूती को भी समझ सके। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में मल्टी-डायमेंशनल इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोसिस्टम मल्टीप्लायर और एडजेंसी वैल्यू को शामिल करने की बात कही गई है। अडानी ने कहा कि उनका CareEdge के साथ संबंध करीब दो दशक पुराना है और अब 100 से ज्यादा एंटिटीज में ₹3 लाख करोड़ से अधिक के रेटेड एसेट्स तक पहुँच चुका है।

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