गौतम खट्टर के फ्रांसिस जेवियर पर बयान से गोवा में विवाद बढ़ा, क्राइम ब्रांच ने लुकआउट नोटिस जारी किया, पुलिस तलाश में जुटी है। गोवा में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जहाँ एक यूट्यूबर और आर्य समाज से जुड़े गौतम खट्टर के बयान ने माहौल गरमा दिया है।
मामला शनिवार (18 अप्रैल 2026) का है, जब साउथ गोवा के वास्को में भगवान परशुराम जयंती के एक कार्यक्रम के दौरान खट्टर ने 16वीं सदी के जेसुइट मिशनरी फ्रांसिस जेवियर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और कई जगहों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में बोलते हुए गौतम खट्टर ने फ्रांसिस जेवियर को आतंकी, क्रूर और बर्बर शासक बताया और उन पर जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप लगाए। इसके साथ ही उन्होंने उनके अवशेषों को लेकर भी अपमानजनक बातें कहीं, जिससे ईसाइयों में नाराजगी फैल गई।
इस मामले में गोवा के कई ईसाई संगठनों और राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। गोवा और दमन के आर्चडायोसीज ने इन बयानों को नफरत फैलाने वाला और दुर्भावनापूर्ण बताया। वहीं कॉन्ग्रेस नेता पीटर डिसूजा ने वास्को पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। दो दिनों के भीतर राज्य के अलग-अलग इलाकों में दर्जनों शिकायतें दर्ज हुईं।
पुलिस ने सभी शिकायतों को वास्को थाने में ट्रांसफर कर गौतम खट्टर के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की और बाद में केस को गोवा क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी कहा कि आरोपित को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

जाँच के दौरान पुलिस ने गौतम खट्टर के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया, ताकि वह देश छोड़कर न जा सके। हालाँकि, वह अभी फरार बताया जा रहा है। इस बीच पुलिस ने उनके भाई माधव खट्टर को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया है, जिन पर भाषण तैयार करने और उसे फैलाने में भूमिका निभाने का आरोप है। साथ ही गौतम खट्टर का इंस्टाग्राम अकाउंट भी भारत में ब्लॉक कर दिया गया है।
गौतम खट्टर कौन हैं?
4 फरवरी 2000 को दिल्ली में जन्मे गौतम खट्टर खुद को स्पिरिचुअल बीट जर्नलिस्ट, यूट्यूबर, लेखक और वक्ता बताते हैं। अपने यूट्यूब चैनल के डिस्क्रिप्शन में वे लिखते हैं कि "मैं गौतम खट्टर, एक स्पिरिचुअल बीट जर्नलिस्ट हूँ या आप मुझे आधा जर्नलिस्ट और आधा यूट्यूबर कह सकते हैं।" उनका यूट्यूब कंटेंट बाबा-साधुओं, सनातन धर्म, विदेशी भक्तों और धार्मिक स्थलों से जुड़ा होता है। उनके चैनल पर करीब 8.97 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

उत्तराखंड में पले-बढ़े गौतम खट्टर को खास पहचान 2021 के हरिद्वार महाकुंभ के दौरान साधुओं के इंटरव्यू और वहाँ से जुड़े वीडियो बनाने के बाद मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर वीडियो बनाए, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।
उनकी पहचान खास तौर पर वेदों, उपनिषदों, भगवद गीता, आर्य समाज के सिद्धांतों और सनातन युवाओं पर पश्चिमी प्रभाव की आलोचना करने वाले कंटेंट से बनी है। इसके अलावा वे सोशल मीडिया पर धर्म और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रहते हैं।
सोशल मीडिया के अलावा गौतम खट्टर सनातन महासंघ नाम के एक संगठन के संस्थापक भी हैं, जो वैदिक साहित्य, हिंदू धर्म और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने का काम करता है। वे आर्य समाज और महर्षि दयानंद सरस्वती के प्रबल अनुयायी माने जाते हैं। उनके धार्मिक और युवाओं से जुड़े कंटेंट और आक्रामक अंदाज ने उन्हें लोकप्रिय बनाया है।
वहीं गोवा में बढ़ते विरोध और राजनीतिक माहौल के बीच इस समय गोवा क्राइम ब्रांच की टीमें फरार चल रहे गौतम खट्टर की तलाश में जुटी हुई हैं।
'सेंट' जेवियर का धर्मांतरण मिशन
फ्रांसिस जेवियर 06 मई 1542 को भारत के गोवा पहुँचा। वह अकेला नहीं आया था, बल्कि पुर्तगाल के राजा जॉन III के समर्थन और आदेश के साथ आया था। उस समय गोवा पूरी तरह पुर्तगाल के कब्जे में था और वहीं से पूरे एशिया में ईसाई मिशन चलाने की योजना बनाई गई थी।
गोवा पहुँचते ही जेवियर ने सबसे पहले बच्चों और गरीब तबके को निशाना बनाकर ईसाई का प्रचार शुरू किया। 1542 से 1545 के बीच उसने तटीय इलाकों, खासकर फिशरमैन समुदाय में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण अभियान चलाया। कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि पुर्तगाली शासन के दबाव और लालच में आकर स्थानीय हिंदू लोगों को अपना धर्म छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
1545 के बाद जेवियर ने गोवा को अपना बेस बनाकर मिशन को और फैलाया। उसने बार-बार पुर्तगाल के शासकों को पत्र लिखकर यहाँ " कड़े धार्मिक कानून' लागू करने की माँग की, ताकि जो लोग धर्मांतरण नहीं कर रहें उन पर दबाव बनाया जा सके। यही वह दौर था जब गोवा में संगठित तरीके से धर्मांतरण की प्रक्रिया तेज हुई और चर्च का प्रभाव लगातार बढ़ता चला गया।
'सेंट' जेवियर की हिंदू-घृणा और हिंदुओं पर अत्याचार
'सेंट' जेवियर पर मौजूदा लेख बताते हैं कि उन्हें हिंदू से इतनी घृणा थी कि वह उन्हें विधर्मी, काफिर तक कहकर संबोधित करते थे। वहीं ब्राह्मणों से उन्हें इतनी दिक्कत थी कि उन्हें वो 'धोखेबाज और झूठा' बताकर पेश करते थे ताकि समाज का विश्वास उनपर से उठ जाए। इसके अलावा वो ईसाई धर्म में लोगों को लाने के लिए ईसाई धर्म की खूबियों के अलावा ये बताते थे कि कैसे हिंदू और उनके देवी-देवता बुरे होते हैं।
फ्रांसिस के बारे में कहा जाता है कि उनके होते हुए गोवा में इतनी तेजी से धर्मांतरण की रफ्तार बढ़ी थी कि वो कई बार पूरे के पूरे गाँव को ईसाई बनवा देते थे। फिर हिंदू बच्चों को मंदिर में ले जाते थे और उनसे देवी-देवताओं को गाली देने को कहते थे, मूर्तियाँ तोड़ने, उनपर थूकने और उन्हें रौंदने के लिए कहते थे। साथ ही उन कलाकारों को भी धमकी दी जाती थी जो मूर्तियाँ बनाने का काम करते थे।
'सेंट' फ्रांसिस जेवियर ने गोवा पर जब पूरा कब्जा किया तो गैर इसाइयों के लिए स्थिति और बद्तर हो गई क्योंकि तब सत्ता ईसाई पादरियों के हाथ आ गई और हिंदू विरोधी कानून बनने शरू हुए। धर्मांतरण के लिए नृशंस यातनाएँ दी जाने लगी। हिंदू माता पिता के सामने बच्चों के अंग काटे जाने लगे। वहीं जो धर्मांतरण के लिए नहीं मानता था उसे सूली पर लटकाकर जलाना शुरू कर दिया गया।
इस तरह जेवियर के काल में धर्मांतरण को अंजाम दिया गया और आगे चल कर जब इतिहासकारों ने इस सच्चाई को लिखना चाहा तो उन्हें भी असहनीय यातनाएँ दी गईं। गोवा में एक 'हाथकाटरो' खंभ भी है। बताया जाता है कि ये हिंदुओं पर पुर्तगाली शासकों के बर्बरता का जीवंत साक्ष्य है। ईसाइयों द्वारा हिंदुओं को इससे बाँधकर उनके अंगों को तोड़ा जाता था।
अब 'सेंट' जेवियर का काल बीते कई सदी हो चुकी हैं। आज ईसाई समुदाय जो हमें उनके बारे में बताता है हम उसी को जानते हैं लेकिन अगर लोगों की सुनी सुनाई बातों से हटकर खुद समझना चाहते हैं कि 'सेंट' जेवियर हिंदुओं के लिए सोच क्या रखते थे तो एक पत्र में लिखी बात पढ़िए जो उन्होंने 1545 में कोचीन से लिखी थी।
(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)
