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मोरबी बिजली प्रोजेक्ट में जमीन देने वाले किसानों को बाजार मूल्य का दोगुना मिलेगा मुआवजा, गुजरात सरकार ने किसानों की माँगों को माना

 गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने मोरबी के प्रदर्शनकारी किसानों की माँगों को स्वीकार कर लिया है। अब सरकार जमीन का मुआवजा दोगुने दर से देगी।

गुजरात के मोरबी जिले में अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) की बिजली पारेषण (पावर ट्रांसमिशन) परियोजना के खिलाफ पिछले तीन हफ्तों से चल रहा किसानों का आंदोलन रंग लाया है।

गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने जेटपर गाँव में प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख माँगों को स्वीकार कर लिया है। सरकार के इस बड़े फैसले से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत मिली है, हालाँकि किसानों का कहना है कि वे आधिकारिक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के तहत मुआवजे की गणना में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसानों को जंत्री (सर्किल) दर के बजाय जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य को आधार मानकर उसकी दोगुनी रकम मुआवजे के रूप में दी जाएगी। किसान बाजार मूल्य का 400% मुआवजा माँग रहे थे, क्योंकि हाई-वोल्टेज लाइनों से उनकी जमीन की कीमत हमेशा के लिए कम हो जाती है। भले ही नई नीति उनकी माँग से थोड़ी कम है, लेकिन यह पिछले नियमों के मुकाबले बहुत बड़ी बढ़ोतरी है।

यह विवाद हलवद ट्रांसमिशन लिमिटेड द्वारा कच्छ के केपीएस-2 पूलिंग स्टेशन से मोरबी के हलवद तक बनाई जा रही 246 किलोमीटर लंबी 756 केवी डीसी ट्रांसमिशन लाइन को लेकर है। इस परियोजना से कच्छ और मोरबी के करीब 400 गाँवों के किसान प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने अब मुआवजे का दायरा भी बढ़ा दिया है। टावर के केवल आधार क्षेत्र के बजाय अब उसके चारों तरफ एक-एक अतिरिक्त वर्ग मीटर जमीन को मुआवजे में जोड़ा जाएगा, जिससे 765 केवी लाइन के लिए मुआवजा क्षेत्र 625 से बढ़कर 729 वर्ग मीटर हो जाएगा।

पारदर्शिता के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में ‘मार्केट रेट कमेटी’ बनेगी, जिसमें किसानों और कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ ही मूल्यांकनकर्ता शामिल होंगे। ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अश्विनी कुमार ने बताया, “यह समिति जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य तय करेगी ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके।” इसके अलावा, अब मुआवजा तीन किश्तों के बजाय एक बार में ही अग्रिम (एडवांस) दे दिया जाएगा। यह नीति उन निर्माणाधीन परियोजनाओं पर भी लागू होगी जहां पहले मुआवजा तय हो चुका था।

कृषि मंत्री और सरकारी प्रवक्ता जीतू वाघानी ने इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा करते हुए कहा, “सरकार ने यह फैसला लेने से पहले अन्य राज्यों की नीतियों का गहराई से अध्ययन किया है। नई संशोधित नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे किसानों को उनकी जमीन का उचित और बाजार आधारित मुआवजा मिले। मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि नीति की समीक्षा करते समय किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाए।”

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