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आधी सदी से लग रहा बेवर में शहीद मेला, यहीं है अनोखा शहीद मंदिर

मैनपुरी (उत्‍तर प्रदेश्‍ा) के बेवर में देश में सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला अपनी तरह का शहीद मेला इस महीने 46वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। देश अपनी आजादी के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका था जब 1972 में क्रांतिकारी जगदीशनारायण त्रिपाठी ने इस अनोखे मेले की शुरुआत की थी। दरअसल यह शहीद मेला 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में शहीद हुए क्षेत्र के क्रांतिकारियों की स्मृति को संजोने और उनके प्रेरक संघर्षों से युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। यह 19 दिवसीय 'शहीद मेला, बेवर' हर वर्ष नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी से शुरू होकर 10 फरवरी को संपन्न होता है।

बीते एक दशक से अधिक समय से अयोध्या में सांप्रदायिकता विरोधी फिल्म महोत्सव का आयोजन, भूले-बिसरे क्रांतिकारियों और उनके परिजनों की खोज और धर्मनिरपेक्ष-सरोकारी फिल्म निर्माण से जुड़े संगठन 'अवाम का सिनेमा' के मुख्य कर्ता-धर्ता शाह आलम ने क्षेत्र के क्रांतिकारी इतिहास का उल्लेख करते हुए आउटलुक को बताया कि 15 अगस्त 1942 को तत्कालीन जूनियर हाईस्कूल बेवर के उत्साही छात्रों का एक जुलूस हाथों में तिरंगा थामे, नारा लगाते, झंडा गीत गाते बेवर थाना पर आ डटा। पुलिस के रोकने और धमकाने की परवाह किए बिना छात्र ब्रिटिश झंडे की जगह थाने पर तिरंगा झंडा फहराने पर अड़े थे कि अंग्रेजी राज की पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें सातवीं कक्षा के छात्र कृष्‍ण कुमार, क्रांतिधर्मी सीताराम गुप्त और यमुना प्रसाद त्रिपाठी शहीद हो गए। शहीदों का शव भी परिवार को न सौंप कर दूसरे दिन सिंहपुर के जंगल में ले जाकर (कथित तौर पर) केरोसिन डालकर जला दिया गया। प्रदर्शनकारियों के शहीद होने और शवों के अपमान की खबर मिलते ही पूरा शहर उबल पड़ा।

नतीजा, लोगों को घर तलाशी, गिरफ्तारियां और तरह-तरह से पुलिस का दमन झेलाना पड़ा। बाद में इन शहीदों की थाने के सामने समाधि बनी और पास ही शहीद मंदिर की स्‍थापना हुई, जो आज भी उनकी कुर्बानी का बखान कर रहा है। ज्ञात आंकड़े के मुताबिक अपनी तरह के इस इकलौते मंदिर में अब तक 26 शहीदों की प्रतिमाएं स्‍थापित की जा चुकी हैं।

आलम ने मेला प्रबंधक राज त्रिपाठी के हवाले से बताया कि हजारों जाने-अनजाने शहीद सेनानियों की यादों को समर्पित यह मेला 46वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।

सुभाष चंद्र बोस जयंती से शुरू होने वाले इस 19 दिवसीय मेले की इस बार की थीम उत्तर भारत के सबसे बड़े गुप्त क्रांतिकारी दल के रूप में जाने गए 'मातृवेदी' संगठन को समर्पित है। मातृवेदी के क्रांतिकारी महानायकों के कई परिजन 23 जनवरी, 2018 को उद्धाटन समारोह में मौजूद होंगे। शहीद प्रदर्शनी, नाटक, फोटो प्रदर्शनी, विराट दंगल, पेंशनर्स सम्मेलन, स्वास्थ्य शिविर, कलम आज उनकी जय बोल, शहीद परिजन सम्मान समारोह, रक्तदान शिविर, विधिक साक्षरता सम्मेलन, किसान पंचायत, स्वतंत्रता सेनानी सम्मेलन, शरीर सौष्ठव प्रतियोगिता, लोकनृत्य प्रतियोगिता, पत्रकार सम्मेलन, कवि सम्मेलन, राष्ट्रीय एकता सम्मेलन वगैरह इस बार के मेले के विशेषआकर्षण होंगे।

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