हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व चैत्र नवरात्रि की आज से शुरुआत हो गई है। यह पावन पर्व 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इन नौ दिनों में भक्तगण मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि, शांति और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में प्रत्येक देवी को उनका प्रिय भोग अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन माता को खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। उन्हें मिश्री, चीनी या शक्कर से बनी चीजों का भोग अर्पित करने से आयु और सुख-शांति में वृद्धि होती है।
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करना शुभ माना गया है, जिससे जीवन के दुख और बाधाएं दूर होती हैं। चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। उन्हें मालपुआ का भोग अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है और इससे समृद्धि आती है।
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस दिन केले का भोग अर्पित करना शुभ होता है, जिससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना होती है। उन्हें शहद या शहद से बनी वस्तुएं अर्पित करने से व्यक्तित्व में आकर्षण और आत्मबल बढ़ता है।
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन गुड़ का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। उन्हें नारियल और उससे बनी चीजों का भोग अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन हलवा-पूरी, काले चने और नारियल का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। इसे अर्पित करने से सिद्धियों की प्राप्ति और जीवन में सफलता मिलती है।
धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में सात्विक आहार, संयमित जीवन और सच्ची श्रद्धा के साथ की गई पूजा से देवी मां प्रसन्न होती हैं। भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी अवसर है। इस दौरान किया गया जप, तप और भक्ति व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है।
इस तरह, अगर श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ नौ दिनों तक देवी के विभिन्न रूपों की पूजा कर उनके प्रिय भोग अर्पित करते हैं, तो उन्हें जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Source : palpalindiaचैत्र नवरात्रि 2026 में डोली पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, विदाई हाथी पर होगी

