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एआई की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट से मेटा तक अरबों डॉलर का दांव, जानिए आखिर क्यों हो रहा रिकॉर्ड निवेश

एआई की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट से मेटा तक अरबों डॉलर का दांव, जानिए आखिर क्यों हो रहा रिकॉर्ड निवेश

ई दिल्ली. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है. माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल, मेटा और अन्य प्रमुख तकनीकी कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, अत्याधुनिक चिप्स और नए एआई मॉडल विकसित करने पर सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश कर रही हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी इतिहास के सबसे बड़े निवेश चक्रों में से एक है. हालांकि निवेशकों और वॉल स्ट्रीट की नजर इस बात पर भी है कि इतने बड़े निवेश से कंपनियों को भविष्य में कितना लाभ मिलेगा और क्या यह खर्च अपेक्षित आय में बदल पाएगा.

बाजार विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक स्तर पर एआई को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है. इसी कारण हर बड़ी कंपनी इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने की कोशिश कर रही है. निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि वर्ष 2031 तक एआई से जुड़े बुनियादी ढांचे पर तकनीकी कंपनियां लगभग 7.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश कर सकती हैं. वहीं जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि 2030 तक एआई से संबंधित पूंजीगत निवेश 5.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. इस निवेश का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करने पर खर्च किया जाएगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई केवल चैटबॉट या वर्चुअल असिस्टेंट तक सीमित नहीं है. इसका उपयोग सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ग्राहक सेवा, डेटा विश्लेषण, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय प्रबंधन, अनुसंधान और औद्योगिक उत्पादन जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है. कंपनियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई नए उत्पाद, नई सेवाएं और राजस्व के नए स्रोत तैयार करेगा. यही कारण है कि वे अभी से इस तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं.

रिपोर्टों के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट अकेले वर्ष 2026 में लगभग 190 अरब डॉलर खर्च करने की तैयारी में है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 61 प्रतिशत अधिक है. वहीं माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट (गूगल), अमेजन समेत पांच बड़ी टेक कंपनियों का कुल पूंजीगत व्यय 2026 में लगभग 730 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इन कंपनियों को "हाइपरस्केलर्स" कहा जाता है, क्योंकि इनके पास दुनिया के सबसे बड़े क्लाउड कंप्यूटिंग नेटवर्क हैं, जिनके माध्यम से एआई सेवाएं संचालित होती हैं.

एआई पर हो रहा अधिकांश निवेश नए चैटबॉट बनाने के बजाय विशाल डेटा सेंटर स्थापित करने, एनवीडिया जैसे उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) खरीदने, हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स लगाने, फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क का विस्तार करने, सर्वरों के लिए अत्याधुनिक कूलिंग सिस्टम विकसित करने और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर खर्च किया जा रहा है. एआई डेटा सेंटर अत्यधिक बिजली की खपत करते हैं, इसलिए कंपनियां परमाणु ऊर्जा, प्राकृतिक गैस और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में भी निवेश बढ़ा रही हैं, ताकि भविष्य में बिजली की कमी उनकी योजनाओं पर असर न डाले.

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई निवेश का सबसे बड़ा लाभ एनवीडिया जैसी कंपनियों को मिल रहा है, जो एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए आवश्यक जीपीयू चिप्स बनाती हैं. इसके अलावा माइक्रोन जैसी मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों की मांग भी तेजी से बढ़ी है. क्लाउड सेवा प्रदाता, डेटा सेंटर निर्माण कंपनियां, ऊर्जा उत्पादक, कूलिंग सिस्टम निर्माता और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां भी इस निवेश चक्र से लाभान्वित हो रही हैं. क्वालकॉम जैसी कंपनियां भी एआई डेटा सेंटर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं.

हालांकि एआई निवेश को लेकर बाजार में उत्साह के साथ चिंता भी बनी हुई है. वॉल स्ट्रीट का मानना है कि तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भविष्य की संभावनाओं को पहले ही शामिल किया जा चुका है. अब निवेशक यह देखना चाहते हैं कि इतने बड़े निवेश के बदले कंपनियां वास्तविक आय और मुनाफा कितना बढ़ा पाती हैं. यदि अपेक्षित राजस्व नहीं मिला तो तकनीकी शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है.

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि एआई क्षेत्र में निवेश करने वाली कई कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर डेटा सेंटर और अन्य बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं. यदि भविष्य में एआई सेवाओं की मांग अनुमान के अनुरूप नहीं बढ़ी तो इन कंपनियों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है. इसलिए निवेशकों को आने वाले वर्षों में बाजार में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए.

एआई का प्रभाव केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार एआई से जुड़े हार्डवेयर और चिप्स की बढ़ती मांग के कारण स्मार्टफोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, टेलीविजन और यहां तक कि कारों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. वहीं एआई डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली खपत भविष्य में कुछ क्षेत्रों में ऊर्जा लागत बढ़ा सकती है. दूसरी ओर कई कंपनियां एआई आधारित ऑटोमेशन को अपनाकर कुछ कार्यों में मानव श्रम की जगह मशीनों का उपयोग कर रही हैं, जिससे रोजगार को लेकर भी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं.

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल, मेटा और अन्य टेक कंपनियां एआई पर किए जा रहे रिकॉर्ड निवेश को किस तरह लाभदायक कारोबार में बदलती हैं. यदि एआई से अपेक्षित आय और उपयोग बढ़ता है तो यह निवेश तकनीकी उद्योग की दिशा बदल सकता है. वहीं यदि मांग उम्मीद के अनुरूप नहीं रही तो बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं. आने वाले कुछ वर्ष यह तय करेंगे कि एआई पर लगाया गया यह विशाल दांव तकनीकी कंपनियों के लिए इतिहास की सबसे बड़ी सफलता साबित होगा या फिर सबसे बड़ी परीक्षा.

Source : palpalindia

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