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गुजरात से बेटी की अस्थियां लेकर जबलपुर पहुंची मां, कहा- ट्रेन के सामने धक्का देकर दामाद ने मारा है

गुजरात से बेटी की अस्थियां लेकर जबलपुर पहुंची मां, कहा- ट्रेन के सामने धक्का देकर दामाद ने मारा है

जबलपुर. गुजरात के वलसाड में ट्रेन से कटकर हुई बेटी की संदिग्ध मौत के बाद उसकी बुजुर्ग मां करीब एक हजार किलोमीटर का सफर तय कर अस्थियां लेकर जबलपुर पहुंची. मां ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत देते हुए आरोप लगाया कि उसकी बेटी की मौत हादसा नहीं, बल्कि हत्या है.

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुजरात पुलिस से संपर्क कर जांच में सहयोग का भरोसा दिया है.

 मां ने पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत देते हुए कहा कि जबलपुर के ग्राम पौड़ा निवासी पिंकी नामदेव की मुलाकात कटनी जिले के बहोरीबंद निवासी महेंद्र नामदेव से हुई थी. दोनों एक ही समाज से थे और परिवार की सहमति से वर्ष 2014 में उनका विवाह हुआ. शादी के बाद दोनों सिलाई का काम करते थे. वर्ष 2018 में बेहतर रोजगार की तलाश में दोनों गुजरात के वलसाड चले गए, जहां एक कंपनी में नौकरी करने लगे. कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में महेंद्र शराब का आदी हो गया.

शराब की लत बढऩे के साथ वह पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट करने लगा. परिवार में बेटा कान्हा (10 वर्ष) और बेटी अवनि (8 वर्ष) हैं. पिंकी की मां लक्ष्मी नामदेव के अनुसार, 5 जून 2026 को महेंद्र ने दोनों बच्चों के सामने पिंकी के साथ बेरहमी से मारपीट की. इससे आहत होकर वह बच्चों को लेकर जबलपुर स्थित अपने मायके आ गई. उसने मां को बताया कि पति रोज शराब पीकर मारपीट करता है और अब उसके साथ रहना संभव नहीं है.

करीब 15 दिन बाद महेंद्र पत्नी को मनाने जबलपुर पहुंचा और माफी मांगकर साथ चलने की बात कही, लेकिन पिंकी तैयार नहीं हुई. इसी बीच बच्चों का गुजरात के नवोदय स्कूल में प्रवेश हो चुका था. स्कूल से लगातार बुलावा आने पर पिंकी बच्चों और मां के साथ दोबारा वलसाड पहुंची, लेकिन पति से अलग किराये के मकान में रहने लगी. मां का आरोप है कि 30 जून 2026 की शाम करीब सात बजे पिंकी जब ड्यूटी खत्म कर कंपनी से बाहर निकली, तभी महेंद्र वहां पहुंच गया. उसने कंपनी के गेट पर ही उसके साथ मारपीट की और जबरन रेलवे ट्रैक की ओर ले गया. आरोप है कि वहां उसने पिंकी को ट्रेन के सामने धक्का दे दिया. परिवार का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं हो सकती, क्योंकि शव के अलग-अलग हिस्से रेलवे ट्रैक पर दूर-दूर मिले थे.

रातभर तलाश, सुबह मिली मौत की खबर-

लक्ष्मी नामदेव ने बताया कि देर रात तक पिंकी घर नहीं लौटी तो उन्होंने कंपनी और परिचितों से संपर्क किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. उन्होंने महेंद्र को फोन किया तो उसने अनभिज्ञता जताई और मोबाइल बंद कर लिया. अगली सुबह महेंद्र ने ही फोन कर बताया कि पिंकी का शव रेलवे ट्रैक पर पड़ा है. सूचना मिलते ही लक्ष्मी मौके पर पहुंचीं और बेटी की पहचान की. वासी टाउन पुलिस ने मर्ग कायम कर शव परिजनों को सौंप दिया. 2 जुलाई को वलसाड में अंतिम संस्कार किया गया.

अस्थियां लेकर पहुंची जबलपुर, पुलिस से मांगी सुरक्षा-

4 जुलाई को लक्ष्मी नामदेव बेटी की अस्थियां और दोनों बच्चों को लेकर जबलपुर पहुंचीं. उन्हें आशंका थी कि महेंद्र और उसके परिजन अस्थियां छीन सकते हैं. स्टेशन से सीधे वह एसपी कार्यालय पहुंचीं और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई. शाम को उन्होंने नर्मदा के खारी घाट पर अपने पोते कान्हा के हाथों पिंकी की अस्थियों का विसर्जन कराया.

Source : palpalindia

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