भारतीय फैशन बाजार में एक बार फिर पारंपरिक ज्वेलरी की वापसी ने नया ट्रेंड सेट कर दिया है और इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में हैं झुमके, जो हर उम्र और हर वर्ग की महिलाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं.
एथनिक वियर के साथ-साथ इंडो-वेस्टर्न आउटफिट्स में भी झुमकों का बढ़ता इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि पारंपरिक डिजाइन अब आधुनिक फैशन का अहम हिस्सा बन चुके हैं. बाजार में उपलब्ध सैकड़ों डिजाइनों और बजट फ्रेंडली विकल्पों ने झुमकों को और अधिक लोकप्रिय बना दिया है, जिससे इनकी मांग लगातार बढ़ रही है.
ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स और ऑफलाइन बाजारों में झुमकों की बिक्री में पिछले कुछ समय में उल्लेखनीय उछाल देखा गया है. फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी ट्रेंड्स ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है. शादी-ब्याह, त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में महिलाएं अब भारी ज्वेलरी के बजाय हल्के लेकिन आकर्षक झुमकों को प्राथमिकता दे रही हैं. यही कारण है कि ज्वेलरी ब्रांड्स भी लगातार नए डिजाइन और कलेक्शन लॉन्च कर रहे हैं, ताकि बदलते ट्रेंड्स के साथ तालमेल बना सकें.
झुमकों की खास बात यह है कि यह एक ऐसा एक्सेसरी है जो साधारण से साधारण आउटफिट को भी खास बना देता है. चाहे साड़ी हो, सलवार सूट, लहंगा या फिर इंडो-वेस्टर्न ड्रेस, हर तरह के परिधान के साथ झुमके आसानी से मैच हो जाते हैं. बाजार में गोल्ड-प्लेटेड, ऑक्सिडाइज्ड, सिल्वर, मीनाकारी और कुंदन जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं, जो अलग-अलग अवसरों के हिसाब से पहने जा सकते हैं. विशेष रूप से फ्लोरल डिजाइन और पर्ल डिटेलिंग वाले झुमके इस समय सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं.
फैशन इंडस्ट्री से जुड़े जानकार बताते हैं कि झुमकों की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी किफायती कीमत भी है. जहां पहले ज्वेलरी खरीदना एक महंगा सौदा माना जाता था, वहीं अब ₹300 से लेकर ₹3000 तक की रेंज में आकर्षक झुमके आसानी से उपलब्ध हैं. इससे न सिर्फ आम उपभोक्ताओं की पहुंच बढ़ी है, बल्कि युवा वर्ग भी इस ट्रेंड को तेजी से अपना रहा है. कॉलेज जाने वाली छात्राओं से लेकर कामकाजी महिलाओं तक, हर कोई अपने स्टाइल में झुमकों को शामिल कर रहा है.
इसके साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर मिल रहे भारी डिस्काउंट और ऑफर्स ने भी बिक्री को बढ़ावा दिया है. कई ब्रांड्स 50% से लेकर 80% तक की छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं. इसके चलते ग्राहक एक ही बार में कई डिजाइन खरीदने में भी रुचि दिखा रहे हैं. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले त्योहारों और वेडिंग सीजन में झुमकों की डिमांड और बढ़ने की संभावना है.
हालांकि बढ़ती मांग के बीच गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि सस्ते झुमकों में इस्तेमाल होने वाला मटेरियल जल्दी खराब हो जाता है या स्किन एलर्जी का कारण बनता है. ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी करते समय मटेरियल और ब्रांड की विश्वसनीयता पर जरूर ध्यान देना चाहिए. हाइपोएलर्जेनिक और स्किन-फ्रेंडली ज्वेलरी को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प माना जा रहा है.
फैशन डिजाइनर्स का मानना है कि झुमकों की सबसे बड़ी खासियत उनकी वर्सेटिलिटी है. एक ही जोड़ी झुमके को अलग-अलग आउटफिट्स के साथ पहनकर अलग-अलग लुक क्रिएट किया जा सकता है. यही कारण है कि महिलाएं अब भारी नेकलेस की बजाय झुमकों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. कई स्टाइल एक्सपर्ट्स यह भी सुझाव देते हैं कि झुमके पहनते समय नेकलाइन सिंपल रखनी चाहिए ताकि पूरा फोकस ईयररिंग्स पर रहे.
इस बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी झुमकों को लेकर खासा क्रेज देखा जा रहा है. इंस्टाग्राम और पिनटेरेस्ट पर 'जुमका लुक' और 'एथनिक स्टाइलिंग' जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं. फैशन ब्लॉगर्स और इंफ्लुएंसर्स लगातार नए-नए स्टाइलिंग आइडियाज शेयर कर रहे हैं, जिससे आम लोग भी आसानी से ट्रेंड को फॉलो कर पा रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में झुमकों का बाजार और विस्तार करेगा. पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन के फ्यूजन के साथ नए प्रयोग किए जा रहे हैं, जिससे यह एक्सेसरी हर पीढ़ी को आकर्षित कर रही है. ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है, क्योंकि कम कीमत में ज्यादा वैरायटी देने से ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
कुल मिलाकर, झुमके अब सिर्फ एक पारंपरिक आभूषण नहीं रहे, बल्कि यह फैशन स्टेटमेंट बन चुके हैं. बदलते ट्रेंड्स, बढ़ती मांग और आसान उपलब्धता ने इन्हें हर महिला के वॉर्डरोब का जरूरी हिस्सा बना दिया है. आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत होगा, जिसमें स्टाइल और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलेगा.
Source : palpalindiaलंदन फैशन वीक में कृति सैनन का एलीगेंट लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बना चर्चा का केंद्र
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