नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों की निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को प्रत्येक जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' (Board of Visitors) का गठन करने का आदेश दिया है.
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यह बोर्ड मॉडल प्रिजन मैनुअल, 2016 के अनुरूप गठित किया जाए और इसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Principal District & Sessions Judge) करेंगे. अदालत ने कहा कि जेलों में पारदर्शिता, मानवाधिकारों की सुरक्षा और नियमित बाहरी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है.
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ जेलों में जाति, लिंग, दिव्यांगता तथा अन्य आधारों पर होने वाले कथित भेदभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई कर रही थी. यह मामला सुकन्या शांता प्रकरण में दिए गए निर्देशों के अनुपालन से संबंधित है, जिसमें जेल सुधार और कैदियों के अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए गए थे.
सुनवाई के दौरान न्यायालय के एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने अदालत को बताया कि अब तक किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश ने जिला स्तर पर बोर्ड ऑफ विजिटर्स का गठन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि मॉडल प्रिजन मैनुअल के अनुसार यह बोर्ड जेलों की स्वतंत्र बाहरी निगरानी का प्रमुख तंत्र है और सुप्रीम कोर्ट पहले ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के साथ समन्वय कर नियमित जेल निरीक्षण करने के निर्देश दे चुका है.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में शीघ्र बोर्ड ऑफ विजिटर्स का गठन किया जाए और उसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपी जाए. अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को भी निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों की जानकारी सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए, ताकि समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से यह भी पूछा कि जेल नियमों में मौजूद आपत्तिजनक और भेदभावपूर्ण प्रावधानों में संशोधन की प्रक्रिया किस चरण में है. अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे 3 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है.
शीर्ष अदालत के इस आदेश को देश की जेल व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कैदियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित होने वाले बोर्ड ऑफ विजिटर्स जेलों की नियमित निगरानी, कैदियों की शिकायतों के समाधान और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
Source : palpalindia
