कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने के कारण पासपोर्ट नवीनीकरण में आई बाधा का एक प्रमुख मामला आखिरकार सुलझ गया है. पूर्व टेलीग्राफ संपादक आर. राजगोपाल का पासपोर्ट दूसरे पुलिस सत्यापन के बाद नवीनीकृत कर दिया गया है.
पहले पुलिस सत्यापन में मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसके कारण उनका पासपोर्ट 100 दिनों से अधिक समय तक लंबित रहा. अधिकारियों के अनुसार अब नया सत्यापन पूरा होने के बाद पासपोर्ट जारी कर दिया गया है और जल्द ही उन्हें सौंप दिया जाएगा.
जानकारी के मुताबिक, आर. राजगोपाल मूल रूप से तिरुवनंतपुरम के निवासी हैं, लेकिन लंबे समय से कोलकाता में रह रहे हैं. उन्होंने हाल ही में सार्वजनिक रूप से बताया था कि मतदाता सूची से नाम हट जाने के कारण उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया अटक गई थी. इसके बाद यह मामला चर्चा में आया और संबंधित अधिकारियों ने दोबारा पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की.
मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दूसरे सत्यापन में कोई प्रतिकूल तथ्य सामने नहीं आया, जिसके बाद पुलिस ने सकारात्मक रिपोर्ट भेज दी. इसके आधार पर पासपोर्ट प्रिंट कर दिया गया है और शीघ्र ही आवेदक को उपलब्ध करा दिया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस मामले का समाधान कर लिया गया है.
बताया जा रहा है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है. कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ऐसे कम से कम 17 मामले सामने आए हैं, जिनमें विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम नहीं होने के कारण पुलिस ने पासपोर्ट सत्यापन में प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी. इनमें अधिकांश मामले ऐसे लोगों के हैं, जो पहले से उसी पते पर रह रहे थे और केवल पासपोर्ट का नवीनीकरण कराना चाहते थे.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह किसी नीति के बजाय प्रक्रिया के स्तर पर उत्पन्न हुई समस्या प्रतीत होती है. ऐसे मामलों की समीक्षा की जा रही है ताकि पात्र आवेदकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े. संबंधित अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की स्थितियों से बचने के लिए सत्यापन प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा सकती है.
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हुए विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे. अंतिम सूची में लाखों नाम हटाए गए, जबकि कई मामलों पर अभी भी कानूनी प्रक्रिया जारी है. ऐसे में मतदाता सूची और अन्य सरकारी दस्तावेजों के बीच समन्वय का मुद्दा भी चर्चा का विषय बना हुआ है.
पूर्व संपादक के मामले में पासपोर्ट नवीनीकरण होने के बाद अन्य प्रभावित लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद जगी है. प्रशासन का कहना है कि जिन मामलों में केवल प्रक्रियागत कारणों से देरी हुई है, उनकी जांच कर नियमानुसार समाधान किया
Source : palpalindiaपश्चिम बंगाल : शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, अब सभी मदरसों में अनिवार्य होगा वंदे मातरम् का गायन

