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मेरठ से हरिद्वार ऋषिकेश तक मेट्रो और रैपिड रेल का बड़ा प्लान कुंभ 2027 से पहले कनेक्टिविटी बदलने की तैयारी

मेरठ से हरिद्वार ऋषिकेश तक मेट्रो और रैपिड रेल का बड़ा प्लान कुंभ 2027 से पहले कनेक्टिविटी बदलने की तैयारी

ई दिल्ली/देहरादून. उत्तर भारत में कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें मेरठ से हरिद्वार और ऋषिकेश तक रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की योजना बनाई गई है.

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार की ओर से केंद्र सरकार को भेजा गया है, जिसका उद्देश्य 2027 में होने वाले कुंभ मेला से पहले दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार के सामने विस्तृत प्रस्ताव रखा है. योजना के तहत मौजूदा Namo Bharat RRTS कॉरिडोर को मेरठ के मोदीपुरम से आगे बढ़ाकर हरिद्वार और ऋषिकेश तक जोड़ा जाएगा. इससे दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी. वर्तमान में दिल्ली से मेरठ तक बन रही रैपिड रेल परियोजना को देश के सबसे आधुनिक परिवहन प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है और इसके विस्तार से इसका प्रभाव क्षेत्र और भी बढ़ जाएगा.

प्रस्ताव के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच एक अलग मेट्रो कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है. इन तीनों शहरों के बीच सालभर भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या आम बात हो गई है. मेट्रो नेटवर्क बनने से इन शहरों के बीच आवागमन आसान होगा और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी. साथ ही, यह परियोजना क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देने का काम करेगी.

सरकार इस पूरे प्रोजेक्ट को कुंभ 2027 की तैयारियों से जोड़कर देख रही है. हरिद्वार में होने वाले इस विशाल धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है. ऐसे में परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. अधिकारियों का मानना है कि यदि रैपिड रेल और मेट्रो का विस्तार समय पर पूरा हो जाता है, तो श्रद्धालुओं को यात्रा में होने वाली दिक्कतों से काफी राहत मिलेगी और भीड़ प्रबंधन भी आसान हो जाएगा.

इस प्रस्ताव के साथ ही राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी केंद्र से आर्थिक सहायता मांगी है. मुख्यमंत्री धामी ने कुंभ क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए बिजली लाइनों को भूमिगत करने और आधुनिक पावर सिस्टम विकसित करने हेतु लगभग 750 करोड़ रुपये की मांग की है. इसके अलावा हरिद्वार में गंगा कॉरिडोर के विकास के लिए भी 750 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें घाटों के सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाओं के निर्माण को शामिल किया गया है.

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दिए हैं. सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर है और जल्द ही इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के सबसे बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश की यात्रा महज दो घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सड़कों पर वाहनों का दबाव भी कम होगा, जिससे प्रदूषण में कमी आने की संभावना है. इसके अलावा मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरिद्वार के बीच एक नया आर्थिक और व्यापारिक कॉरिडोर विकसित हो सकता है, जिससे स्थानीय उद्योगों और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों में इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है. व्यापारिक संगठनों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है. होटल, ट्रैवल और छोटे व्यवसायों को इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

हालांकि, इस बड़े प्रोजेक्ट के सामने कई चुनौतियां भी हैं. भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियां और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से काम करना होगा. साथ ही, समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर तब जब इसे कुंभ 2027 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

फिलहाल, यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के विचाराधीन है और आने वाले समय में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. यदि यह योजना धरातल पर उतरती है, तो यह न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि उत्तर भारत के परिवहन तंत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव भी लाएगी. यह परियोजना धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है और आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव दूरगामी हो सकता है.

Source : palpalindia

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