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रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था बेपटरी, 20 हजार छात्रों का भविष्य अधर में

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था बेपटरी, 20 हजार छात्रों का भविष्य अधर में

बलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुवि) की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत स्नातक प्रथम वर्ष की वार्षिक परीक्षाएं मार्च-अप्रैल में आयोजित कर मई-जून तक परिणाम घोषित किए जाने का प्रावधान है, लेकिन जुलाई का पहला सप्ताह समाप्त होने के बाद भी विश्वविद्यालय परीक्षा का टाइम टेबल जारी नहीं कर सका है।

इससे विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत करीब 20 हजार विद्यार्थी भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता में हैं। परीक्षा में लगातार हो रही देरी का सीधा असर विद्यार्थियों के उच्च कक्षाओं में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और आगामी शैक्षणिक सत्र की नियमित पढ़ाई पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में बीए, बीकॉम, बीएससी, बीएचएससी, बीसीए, बीबीए और बीबीए होटल मैनेजमेंट सहित स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। परीक्षा तिथियां घोषित नहीं होने के कारण विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा कब होगी, परिणाम कब आएगा और अगली कक्षा की पढ़ाई आखिर कब शुरू होगी। लगातार बढ़ती देरी से पूरा शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित होता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 मई 2026 को परीक्षा आवेदन भरने की अधिसूचना जारी की थी। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 27 मई निर्धारित की गई थी और निर्धारित समय में आवेदन प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी। इसके बावजूद एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी परीक्षा कार्यक्रम जारी नहीं किया गया। इस स्थिति ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रबंधन प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं और कई विश्वविद्यालय परिणाम भी घोषित कर चुके हैं। इसके विपरीत रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय अब तक परीक्षा तिथियां तय नहीं कर पाया है। उनका मानना है कि यदि जल्द परीक्षा कार्यक्रम जारी नहीं किया गया तो पूरा शैक्षणिक सत्र और अधिक पिछड़ जाएगा। साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत समयबद्ध अकादमिक कैलेंडर लागू करने का उद्देश्य भी प्रभावित होगा। परीक्षा में हो रही देरी को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। छात्रों का कहना है कि समय पर परीक्षा और परिणाम नहीं आने से आगे की पढ़ाई, प्रवेश प्रक्रिया और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है। कई विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुनील दुबे का कहना है कि जनगणना कार्य में विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकांश अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने के कारण परीक्षा कार्यक्रम तैयार करने में विलंब हुआ है। उन्होंने बताया कि स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं 10 जुलाई से प्रारंभ की जा रही हैं और स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा का कार्यक्रम भी जल्द जारी कर दिया जाएगा। हालांकि विद्यार्थियों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि परीक्षा कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य अनिश्चितता से बाहर निकल सके।

Source : palpalindia

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