कटनी. एमपी के कटनी में विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक कानूनी मुश्किलों से घिरे हुए है. इसके बाद भी उन्होने अपनी विधानसभा से जनादेश कराने की बात कही है. मौजूदा कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे होने पर उन्होने कैमोर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर जनता के बीच अपनी उपयोगिता और लोकप्रियता का आकलन करना चाहिए.
जनादेश में 51 फीसदी से कम वोट मिलने पर वे पद से इस्तीफा देंगे.
विधायक संजय पाठक ने कहा कि 2023 में जब चुनाव होने थे, तब भी जनादेश कराया था तो लोग बोले कि ये क्या कर रहे हो. मैंने कहा था कि मैं चुनाव लडऩे योग्य हूं कि नहीं. आप मुझे विधायक बनाना चाहते हो या नहीं. अगर आप लोग नहीं चाहेंगे और हम जबर्दस्ती टिकट लेकर बैठ जाएं ये सही नहीं है. इसमें एक लाख 40 हजार वोट भी मिले. बैठे-बैठे सोच रहा था कि दो साल से ज्यादा हो गया विधायक बने हुए, बने रहना चाहिए या नहीं, इसे चेक कर लेना चाहिए. जैसे जनादेश कराया था, वैसे ही मौका निकालेंगे. देखेंगे कि ढाई साल के कार्यकाल को जनता कितने नंबर देगी. सोचा कि ऐसा करके देखा जाए कि मैं योग्य हूं कि नहीं आपकी सेवा करने के लिए. मई-जून में समय निकालेंगे. एक बार फिर से क्रॉस चेक करेंगे. जनता के कटघरे में आएंगे कि मैं विधायक बनूं या छोड़ दूं. मैं अपनी गलतियां और कमियां पूछने जाऊंगा. अगर 51 प्रतिशत से कम रहा तो बजरंगबली की कसम, उसी दिन विधायकी छोड़ दूंगा. अगर ऊपर रहा तो पांच साल तक सेवा करेंगे.
पिछले चुनाव से पहले भी करा चुके हैं जनादेश-
यह पहली बार नहीं है जब संजय पाठक इस तरह का प्रयोग कर रहे हैं. इससे पहले 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जून महीने में भी उन्होंने ऐसा ही जनादेश कराया था. उस समय इस निजी चुनाव को बाकायदा चुनाव आयोग की तर्ज पर सैकड़ों कर्मचारियों की मदद से कराया गया था. मतगणना के लिए 66 टेबल लगाई गई थीं और करीब 215 लोगों को इस काम में लगाया गया था. कुल 290 मतपेटियों की गिनती हुई थी. विजयराघवगढ़ क्षेत्र के कुल 2.33 लाख मतदाताओं में से 1 लाख 37 हजार 55 लोगों ने वोट डाले थे.
विवादों से जुड़े रहा संजय पाठक का नाम-
यह कवायद ऐसे समय हो रही है जब संजय पाठक का नाम लगातार विवादों से जुड़ रहा है, वे कानूनी मुश्किलों से घिरे नजर आ रहे हैं. उनके खिलाफ कई बड़े मामले चल रहे हैं, जो राजनीतिक भविष्य के लिए चुनौती हैं. उन पर सहारा जमीन घोटाला और एक्सिस माइनिंग के गंभीर आरोप हैं. 443 करोड़ रुपए के जुर्माने का सरकारी शिकंजा है. हाईकोर्ट के जज को कथित फोन मामले में आपराधिक अवमानना का आदेश भी है.
2025 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई, जांच आगे नहीं बढ़ी-
कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने जून 2025 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई. इसमें कहा कि पाठक परिवार की कंपनियों के अवैध खनन की शिकायतें ईओडब्ल्यू में की थीं. 6 महीने बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ी. केस में पाठक परिवार की कंपनियों ने इंटर विन एप्लीकेशन लगाई. इस बीच खनिज विभाग के प्रमुख सचिव ने इनके खिलाफ 443 करोड़ का जुर्माना लगाया.

