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संविदा कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक फैसला, अब सीधी भर्ती में मिलेगा 50 प्रतिशत आरक्षण और उम्र में बड़ी छूट

संविदा कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक फैसला, अब सीधी भर्ती में मिलेगा 50 प्रतिशत आरक्षण और उम्र में बड़ी छूट

भोपाल. मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों के हित में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाते हुए भर्ती नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है. मध्य प्रदेश राज्य एवं अधीनस्थ शिक्षा सेवा शाला भर्ती और पदोन्नति नियमों में पूरे 10 साल बाद यह बड़ा संशोधन किया गया है, जिसके तहत अब सरकारी विभागों की सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत पद संविदा कर्मचारियों के लिए आरक्षित रहेंगे.

राज्य सरकार द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के अनुसार, इस फैसले से उन संविदा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा जो लंबे समय से नियमितीकरण या भर्ती में वरीयता की मांग कर रहे थे. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस विशेष आरक्षण का लाभ एक कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल में केवल एक ही बार ले सकेगा और एक बार नियमित पद पर नियुक्ति मिलने के बाद दोबारा भर्ती परीक्षा में यह लाभ देय नहीं होगा.

नए प्रावधानों के तहत आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं संविदा कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने रिक्त नियमित पदों के समकक्ष संविदा पद पर कम से कम 5 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली हो. आवेदन की अंतिम तिथि तक यह सेवा अवधि पूर्ण होना अनिवार्य है और इसके प्रमाण स्वरूप सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा. नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा के बीच में कोई अंतराल आया है, तो उस गैप की अवधि को 5 साल की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा. इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने संविदा पदों की नियमित पदों के साथ समकक्षता निर्धारित करने के लिए भी मापदंड तय किए हैं ताकि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो.

आयु सीमा के मामले में भी सरकार ने संविदा अधिकारियों को बड़ी राहत प्रदान की है. अब संविदा पर कार्य करने वाले अभ्यर्थी जितने वर्षों तक सेवा में रहे हैं, उन्हें उतने ही वर्षों की छूट आयु सीमा में दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 55 वर्ष निर्धारित की गई है. इसके साथ ही सीधी भर्ती की प्रक्रिया में अब 10 प्रतिशत पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए भी आरक्षित किए जाएंगे. नियमित पदों पर होने वाली इन भर्तियों में रोस्टर प्रणाली का कड़ाई से पालन किया जाएगा ताकि सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके. सरकार के इस निर्णय से शिक्षा विभाग सहित अन्य अधीनस्थ सेवाओं में कार्यरत हजारों संविदा कर्मियों के नियमित होने का रास्ता साफ हो गया है.

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव का संविदा कर्मियों के लिए 'मास्टरस्ट्रोक' माना जा रहा है. 2023 की संविदा नीति पर आने वाले इस बड़े अपडेट ने कर्मचारियों में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है. जानकारों का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से न केवल अनुभवी कर्मचारियों को मुख्यधारा में आने का मौका मिलेगा, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यक्षमता में भी सुधार होगा. संविदा कर्मियों के लिए समकक्षता और योग्यता के नियमों को कड़ा रखते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो. प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद मिला न्याय बताया है.

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