जबलपुर. सिहोरा जनपद पंचायत क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है, जहां सरकारी योजनाओं के तहत संचालित स्व-सहायता समूहों में लाखों रुपये के गबन और धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
मामले में पंचशील ग्राम संगठन की अध्यक्ष कंचन नामदेव और स्थानीय व्यापारी विकास जैन के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशा देवी पटले द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई है।
जानकारी के अनुसार, मामला सिहोरा विकासखंड के ग्राम अमगवां से जुड़ा है, जहां पंचशील ग्राम संगठन और राधा स्व-सहायता समूह के वित्तीय लेनदेन में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं। शिकायत मिलने के बाद 4 नवंबर 2025 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी, जिसे मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित संगठनों के खातों और दस्तावेजों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था।
जांच के दौरान वसुंधरा सीएलएफ और उससे जुड़े समूहों के बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि संगठन की अध्यक्ष कंचन नामदेव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए खातों का संचालन मनमाने तरीके से किया और समूह की राशि का निजी उपयोग किया। जांच में यह भी पाया गया कि उपार्जन कार्य के लिए प्राप्त 26,85,627 रुपये के विरुद्ध व्यापारी विकास जैन को 28,80,000 रुपये का भुगतान किया गया, जो नियमों के विपरीत था। यह राशि दो किस्तों में दी गई, जिससे वित्तीय अनियमितता स्पष्ट रूप से सामने आई।
समिति को जांच के दौरान भारी मात्रा में नकद निकासी के प्रमाण भी मिले। कंचन नामदेव द्वारा अपने नाम पर 4,20,000 रुपये निकाले गए, जबकि अन्य खातों से भी लाखों रुपये की निकासी की गई। राधा स्व-सहायता समूह के खाते से 1,15,000 रुपये की निकासी के साथ-साथ अन्य नामों पर भी बड़ी रकम निकालने के दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा 4,75,000 रुपये स्वयं के नाम और 1,25,000 रुपये एक अन्य व्यक्ति के नाम पर निकाले जाने के प्रमाण सामने आए हैं।
जांच में संदिग्ध लेनदेन का भी खुलासा हुआ है, जिसमें अरिहंत रोडलाइंस के माध्यम से लाखों रुपये का लेनदेन कर उसे वापस किया गया। साथ ही, विकास जैन से 1,75,000 रुपये प्राप्त कर अन्य खातों में स्थानांतरित किए जाने जैसे मामले भी सामने आए हैं, जिनका कोई स्पष्ट आधार नहीं दिया गया। इन सभी तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
कई बार नोटिस देने और जवाब तलब करने के बावजूद संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए। मध्य प्रदेश पुलिस के तहत थाना खितौला में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(5) और 3(5) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है।
मामले की सूचना जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को भेज दी गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में इसमें और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह घटना सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी तंत्र की मजबूती की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।
Source : palpalindia
