नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने टीवी न्यूज चैनलों की टीआरपी यानी टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स पर लगी रोक को एक बार फिर बढ़ा दिया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को निर्देश देते हुए कहा है कि न्यूज चैनलों की टीआरपी को अगले चार हफ्तों तक और जारी नहीं किया जाएगा।
यह लगातार तीसरी बार है जब सरकार ने इस तरह का फैसला लिया है, जिससे न्यूज इंडस्ट्री में हलचल तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि इससे पहले 6 मार्च 2026 को सरकार ने पहली बार चार सप्ताह के लिए टीआरपी जारी करने पर रोक लगाई थी। इसके बाद 31 मार्च को इसे आगे बढ़ाते हुए एक और चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब 6 मई को जारी नए आदेश के तहत इस प्रतिबंध को फिर से चार हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि ताजा आदेश में विस्तार का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह फैसला पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और उससे जुड़ी संवेदनशील खबरों की कवरेज को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
टीआरपी किसी भी टीवी चैनल या कार्यक्रम की लोकप्रियता मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना होता है, जिसके आधार पर विज्ञापन दरें तय होती हैं और चैनलों के बीच प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित होती है। ऐसे में टीआरपी पर रोक लगने से न्यूज चैनलों के बिजनेस मॉडल और कंटेंट रणनीति पर सीधा असर पड़ सकता है।
सरकार ने अपने पहले के आदेशों में यह स्पष्ट किया था कि कुछ न्यूज चैनल संकट के समय में "अनावश्यक सनसनीखेज और अटकलों पर आधारित कंटेंट" प्रसारित कर रहे थे, जिससे दर्शकों में भय और असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर उन लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ता है, जिनके परिवार या परिचित प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया था, ताकि न्यूज कवरेज अधिक जिम्मेदार और संतुलित बनी रहे।
लोकसभा में भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए गए थे, जिसके जवाब में मंत्रालय ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई चैनलों की रिपोर्टिंग में अतिशयोक्ति और बिना पुष्टि की गई जानकारी देखने को मिली थी। ऐसे हालात में टीआरपी की प्रतिस्पर्धा चैनलों को ज्यादा सनसनीखेज खबरें दिखाने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिसे नियंत्रित करना जरूरी था।
इस फैसले के चलते अब न्यूज चैनलों को कम से कम एक और महीने तक बिना सार्वजनिक टीआरपी आंकड़ों के काम करना होगा। इससे उनकी दर्शक संख्या का आकलन करना मुश्किल होगा, लेकिन सरकार का मानना है कि यह कदम दीर्घकाल में मीडिया की जिम्मेदारी और विश्वसनीयता को मजबूत करेगा।
मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि टीआरपी पर रोक लगाना एक अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन इससे न्यूज इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे जरूरी कदम मानते हैं, खासकर उन परिस्थितियों में जब राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान सूचना का सही और संतुलित प्रवाह बेहद जरूरी होता है।
फिलहाल यह साफ है कि जब तक सरकार की ओर से कोई नया निर्देश जारी नहीं होता, तब तक न्यूज चैनलों को बिना टीआरपी के ही अपनी रणनीति बनानी होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का मीडिया इंडस्ट्री और दर्शकों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
Source : palpalindia
