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वैभव सूर्यवंशी की कुंडली में महाग्रहों का ऐसा दुर्लभ महासंयोग जो रचने जा रहा है क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा कीर्तिमान

वैभव सूर्यवंशी की कुंडली में महाग्रहों का ऐसा दुर्लभ महासंयोग जो रचने जा रहा है क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा कीर्तिमान

भारतीय क्रिकेट जगत में इन दिनों एक ऐसे युवा सितारे की चमक हर तरफ बिखर रही है जिसने अपनी बल्लेबाजी से पूरी दुनिया के दिग्गज गेंदबाजों की लाइन और लेंथ बिगाड़ कर रख दी है। इस अद्भुत और जादुई खिलाड़ी का नाम वैभव सूर्यवंशी है, जिनकी खेल प्रतिभा के पीछे न सिर्फ उनकी कड़ी मेहनत है बल्कि उनकी जन्म कुंडली में बैठे महाग्रहों का एक ऐसा दुर्लभ और चमत्कारी संयोग भी है जो सदियों में किसी एक विरले जातक की कुंडली में ही दिखाई देता है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 27 मार्च 2011 को जन्मे इस असाधारण बालक की कुंडली का गहन विश्लेषण करने पर जो सच सामने आया है, उसने न केवल खेल प्रेमियों बल्कि बड़े-बड़े ज्योतिषाचार्यों को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। वैभव सूर्यवंशी की कुंडली में चंद्र और राहु का एक ऐसा अद्भुत 'ग्रहण योग' बना हुआ है, जिसे सामान्य तौर पर लोग नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, लेकिन जब यह योग किसी विशिष्ट लग्न और राशि में बैठता है तो वह जातक को एक साधारण इंसान से सीधे इतिहास पुरुष और वैश्विक महानायक की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वैभव सूर्यवंशी की कुंडली में यह योग एक ऐसे समुद्री तूफान की तरह काम कर रहा है, जिसके सामने टिक पाना दुनिया के बड़े से बड़े नामी और खूंखार गेंदबाजों के बस की बात नहीं रह गई है और उनके बड़े-बड़े रिकॉर्ड्स के जहाज इस तूफान के आगे ताश के पत्तों की तरह ढहते नजर आ रहे हैं।

खगोलीय और ज्योतिषीय विश्लेषण के मुताबिक वैभव सूर्यवंशी की कुंडली में 'चंद्र' का सीधा तात्पर्य पानी और तरलता से है, जो उनके खेल में निरंतरता और प्रवाह को दर्शाता है, लेकिन यह चंद्र देव जिस राशि में विराजमान हैं वह है 'धनु राशि'। धनु राशि को ज्योतिषीय कालपुरुष की कुंडली में पूर्णतः 'अग्नि तत्व' की राशि माना जाता है और इस राशि का मूल स्वभाव ही 'लक्ष्य प्रधान' होना होता है। जब पानी का कारक ग्रह अग्नि तत्व की इस लक्ष्य प्रधान धनु राशि में प्रवेश करता है, तो वहां एक जबरदस्त ऊर्जा और महाविस्फोटक योग का निर्माण होता है, जिसे केवल एक धुरंधर खिलाड़ी ही संभाल सकता है। इस अद्वितीय योग को और अधिक आक्रामक और अजेय बनाने का काम पापी और मायावी ग्रह 'राहु' कर रहा है, जिसने चंद्र के साथ मिलकर इस ग्रहण योग को एक प्रचंड और विनाशकारी 'समुद्री तूफान' का रूप दे दिया है। राहु का स्वभाव ही भ्रम पैदा करना, लीक से हटकर काम करना और अप्रत्याशित सफलता दिलाना है। यही वजह है कि जब वैभव मैदान पर उतरते हैं, तो विरोधी टीम के कप्तान और दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाज उनकी रणनीति को समझ पाने में पूरी तरह नाकाम साबित होते हैं। यह राहु का ही चमत्कारी प्रभाव है कि वैभव सूर्यवंशी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से बड़े-बड़े गेंदबाजों के आत्मविश्वास को पल भर में नेस्तनाबूद कर देते हैं और मैदान पर एक ऐसा चक्रवात लेकर आते हैं जिसमें विपक्षी टीम तिनके की तरह उड़ जाती है।

ग्रहों की इस अनोखी और रहस्यमयी चाल को अगर गहराई से समझा जाए, तो राहु और चंद्र का यह अद्वितीय महायोग वैभव की कुंडली के 'धन भाव' में निर्मित हुआ है, जो जीवन में असीमित प्रसिद्धि, वैभव, ऐश्वर्य और कीर्ति का कारक माना जाता है। इसके साथ ही कुंडली के अन्य महत्वपूर्ण ग्रहों की स्थिति को देखें तो शनि, केतु और शुक्र जैसे शक्तिशाली ग्रहों को छोड़कर बाकी के लगभग सभी समस्त ग्रह कुंडली के 'पंचम भाव' में एक साथ स्थित होकर एक अत्यंत बलवान और दुर्लभ राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। ज्योतिष विज्ञान का यह अकाट्य और सार्वभौमिक नियम है कि जब भी किसी जातक की जन्म कुंडली में 'लग्न का स्वामी' यानी लग्नेश स्वयं उठकर 'पंचम भाव' में जाकर बैठ जाता है, तो वह जातक संसार में कोई साधारण जीवन जीने के लिए पैदा नहीं होता, बल्कि वह एक अत्यंत विशिष्ट और अद्वितीय व्यक्तित्व का स्वामी बनता है। ऐसा जातक इस भूलोक पर केवल और केवल परम सम्मान, अटूट ख्याति और वैश्विक गौरव प्राप्त करने के उद्देश्य से ही जन्म लेता है। वैदिक ज्योतिष के मर्मज्ञों का साफ तौर पर मानना है कि एक ही जन्म की मेहनत से कोई भी इंसान इतना महान, कुशल और जीनियस नहीं बन सकता है। वैभव सूर्यवंशी की यह अद्भुत खेल शैली, उनका अटूट एकाग्रता स्तर और विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रहकर मैच का रुख पलट देने की यह जादुई कला स्पष्ट रूप से प्रमाणित करती है कि वे अपने पिछले कई जन्मों के मांझे हुए खिलाड़ी हैं, जो अपने पूर्व जन्मों के संचित कर्मों और अधूरी साधना को इस जन्म में पूर्ण करने के लिए क्रिकेट के मैदान पर अवतरित हुए हैं।

भारतीय ज्योतिष की प्रामाणिक संहिताओं और भृगु संहिता के सिद्धांतों के अनुसार यदि किसी भी साधारण या असाधारण व्यक्ति की कुंडली में लग्नेश पंचम भाव में चला जाए या फिर इसके विपरीत 'पंचमेश' स्वयं लग्न भाव में आकर विराजमान हो जाए, तो वह व्यक्ति विधाता की तरफ से चुनी हुई एक बेहद खास और दिव्य आत्मा होता है। ऐसे भाग्यशाली और विशिष्ट व्यक्तियों के जीवन का एकमात्र ध्येय और नियति यह होती है कि वे अपने कर्मक्षेत्र में सर्वोच्च शिखर पर पहुंचें और पूरी दुनिया से केवल इनाम, पुरस्कार, मेडल और सर्वोच्च सम्मान हासिल करें। वैभव सूर्यवंशी की कुंडली का यह पंचम भाव उनके पूर्व पुण्य और उनकी आंतरिक प्रज्ञा को इस कदर ऊर्ध्वगामी बना रहा है कि खेल जगत का हर बड़ा पुरस्कार और सम्मान खुद-ब-खुद खिंचा चला आएगा। उनकी कुंडली में ग्रहों का यह अद्भुत राजाधिराज योग इस बात की शत-प्रतिशत गवाही दे रहा है कि आने वाले समय में वे क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले दिग्गजों के रिकॉर्ड को भी चुनौती देंगे और विश्व क्रिकेट के पटल पर भारत का परचम इतनी ऊंचाई पर लहराएंगे जहां तक पहुंच पाना किसी भी अन्य समकालीन खिलाड़ी के लिए एक बड़े सपने जैसा होगा। ज्योतिषीय जगत में वैभव की इस कुंडली को खेल इतिहास की सबसे ताकतवर कुंडलियों में से एक माना जा रहा है, जो आने वाले समय में उन्हें खेल की दुनिया का बेताज बादशाह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु

9893280184

मां कामाख्या साधक जन्म कुंडली विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री

Source : palpalindia

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