लंदन. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने विंबलडन 2026 के दौरान टेनिस के दिग्गज नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बीच एक खास समानता बताते हुए दोनों की मानसिक मजबूती और दबाव में शांत रहने की क्षमता की जमकर तारीफ की है.
दीप्ति का कहना है कि जोकोविच और धोनी अपने-अपने खेल के ऐसे खिलाड़ी हैं, जो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोते और यही गुण उन्हें दुनिया के महान खिलाड़ियों की श्रेणी में अलग पहचान दिलाता है. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं और वह उनके खेल को बेहद करीब से फॉलो करती हैं.
दीप्ति शर्मा महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम के अभियान के समाप्त होने के बाद लंदन में आयोजित प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट विंबलडन देखने पहुंचीं. उन्होंने बताया कि ऑल इंग्लैंड क्लब में जाकर विंबलडन का मुकाबला देखना उनका वर्षों पुराना सपना था. अब तक वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को केवल टेलीविजन पर देखा करती थीं, लेकिन इस बार उन्हें दुनिया के सबसे बड़े टेनिस आयोजनों में से एक का माहौल करीब से देखने का अवसर मिला. उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए ऐसे ऐतिहासिक टूर्नामेंट का हिस्सा बनना बेहद प्रेरणादायक अनुभव होता है.
जियो हॉटस्टार से बातचीत के दौरान दीप्ति शर्मा से जब नोवाक जोकोविच के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोग जोकोविच की मानसिक मजबूती की चर्चा करते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वह कभी हार नहीं मानते. चाहे मैच कितना भी कठिन क्यों न हो, वह अंत तक संघर्ष करते हैं और वापसी करने की क्षमता रखते हैं. दीप्ति ने कहा कि यही गुण उन्हें भारतीय क्रिकेट के महान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की याद दिलाता है.
दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में यदि किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह एमएस धोनी हैं. उन्होंने कहा कि धोनी हमेशा बेहद शांत और संयमित नजर आते हैं. चाहे मुकाबला कितना भी दबाव भरा क्यों न हो, उनके चेहरे पर घबराहट दिखाई नहीं देती. उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय टीम मुश्किल परिस्थितियों में होती थी, धोनी अपने धैर्य, अनुभव और सटीक फैसलों से टीम को संभाल लेते थे. यही कारण है कि उन्हें दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में गिना जाता है.
उन्होंने आगे कहा कि जोकोविच और धोनी दोनों में एक दुर्लभ समानता है. दोनों खिलाड़ी सबसे कठिन समय में भी मानसिक रूप से मजबूत बने रहते हैं और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं. दीप्ति के अनुसार इन दोनों दिग्गजों को देखकर युवा खिलाड़ियों को यह सीख मिलती है कि खेल में केवल तकनीक या प्रतिभा ही सफलता की गारंटी नहीं होती, बल्कि मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है.
दीप्ति शर्मा ने बातचीत के दौरान अपने पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी का भी खुलासा किया. उन्होंने कहा कि बचपन में वह रोजर फेडरर और राफेल नडाल के मुकाबले बड़े उत्साह से देखती थीं और लंबे समय तक दोनों की प्रशंसक रहीं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में नोवाक जोकोविच उनके सबसे पसंदीदा खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने कहा कि वह जोकोविच के लगभग हर बड़े मुकाबले को फॉलो करती हैं और उनके खेलने का अंदाज, संघर्ष करने की क्षमता तथा कभी हार नहीं मानने वाला रवैया उन्हें बेहद प्रेरित करता है.
दीप्ति ने कहा कि जोकोविच कोर्ट पर जिस तरह हर अंक के लिए लड़ते हैं, वह किसी भी खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है. उन्होंने कहा कि कई बार खिलाड़ी मुश्किल परिस्थितियों में मानसिक रूप से टूट जाते हैं, लेकिन जोकोविच हमेशा वापसी का रास्ता तलाशते हैं. यही गुण उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है. उनके अनुसार एक सफल खिलाड़ी बनने के लिए मानसिक मजबूती सबसे बड़ा हथियार होती है और जोकोविच इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं.
गौरतलब है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम का टी20 विश्व कप 2026 का सफर ग्रुप चरण में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार के बाद समाप्त हो गया था. इसके बाद दीप्ति शर्मा ने विंबलडन का रुख किया और वहां से अपने अनुभव साझा किए. खेल प्रेमियों ने भी उनके बयान को काफी पसंद किया है. सोशल मीडिया पर कई प्रशंसकों ने कहा कि अलग-अलग खेलों के महान खिलाड़ियों के बीच समानताओं को पहचानना खेल भावना को और मजबूत बनाता है.
उधर, नोवाक जोकोविच विंबलडन 2026 में इतिहास रचने की कोशिश में जुटे हैं. वह अपने करियर का रिकॉर्ड 25वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के साथ विंबलडन का आठवां खिताब भी हासिल करना चाहते हैं. यदि वह ऐसा करने में सफल रहते हैं तो टेनिस इतिहास में उनका नाम और भी सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो जाएगा. तीसरे दौर में उनका मुकाबला फ्रांस के आर्थर रिंडरकनेश से होना है, जिस पर दुनिया भर के टेनिस प्रशंसकों की नजरें टिकी हैं.
दीप्ति शर्मा का मानना है कि चाहे क्रिकेट हो या टेनिस, बड़े खिलाड़ी वही होते हैं जो दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते. उन्होंने कहा कि एमएस धोनी और नोवाक जोकोविच जैसे दिग्गज खिलाड़ियों से हर युवा खिलाड़ी को सीख लेनी चाहिए कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना और अंत तक संघर्ष करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. यही कारण है कि दोनों अपने-अपने खेल से आगे बढ़कर दुनिया भर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं.
Source : palpalindiaबेन स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा, इंग्लैंड के महान ऑलराउंडर का ऐतिहासिक सफर थमेगा
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