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भीड़ में भी अकेले हैं 77% युवा! जानिए क्यों 25 के बाद अच्छे दोस्त मिलना हो जाता है नामुमकिन

भीड़ में भी अकेले हैं 77% युवा! जानिए क्यों 25 के बाद अच्छे दोस्त मिलना हो जाता है नामुमकिन

Pardaphash 2 weeks ago

ई दिल्ली। आज का युवा 25 वर्ष की उम्र पार करते ही एक अजीब से संकट से जूझ रहा है। एक तरफ करियर की ​चिंता तो दूसरी तरफ छूटते दोस्त और बढ़ता अकेलापन। विशेषज्ञों के अनुसार, इस उम्र में नई दोस्ती करना युवाओं के लिए किसी पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल काम बनता जा रहा है।

हाल ही में आए कई सामाजिक सर्वेक्षणों और मनोवैज्ञानिक रिपोर्टों से पता चलता है कि आज के कामकाजी युवा और Gen Z इतिहास के सबसे अकेले दौर से गुजर रहे हैं। एक शोध के अनुसार, लगभग 77 प्रतिशत युवा दोस्तों और सोशल मीडिया फॉलोअर्स की भीड़ के बीच भी अंदरूनी अकेलेपन का शिकार हैं।

दोस्ती की राह में रोड़ा बन रही हैं ये पांच बड़ी वजहें

समाजशास्त्रियों ने वयस्कता (Adulthood) में दोस्ती टूटने और नए दोस्त न बन पाने के पीछे कुछ मुख्य कारणों को रेखांकित किया है​ जिनमें आती है—

करियर की अंधी दौड़

25 की उम्र जीवन का वह पड़ाव है जहां नौकरी बचाना, प्रमोशन पाना और भविष्य सुरक्षित करना पहली प्राथमिकता बन जाता है। इस व्यस्तता में सामाजिक जीवन पूरी तरह खत्म होने के कगार पर चला जाता है।

समय का भारी संकट

ऑफिस के 9 बजे से 6 बजे तक की कड़ी ड्यूटी और वीकेंड पर घरेलू कामों के बोझ के चलते युवाओं के पास किसी नए व्यक्ति के लिए समय ही नहीं बचता।

बदलते लाइफस्टेज और दूरियां

यह एक ऐसी उम्र है जिसमें दोस्तों के रास्ते अलग होने लगते हैं। कोई उच्च शिक्षा के लिए विदेश चला जाता है, तो कोई शादी करके पारिवारिक जीवन में व्यस्त हो जाता है। इसी के चलते पुराने समीकरण बदल जाते हैं।

'सोशल बैटरी' का खत्म होना

पूरे हफ्ते मानसिक तनाव झेलने के बाद, वीकेंड पर युवाओं के पास नए लोगों से मिलने या बातचीत शुरू करने की मानसिक ऊर्जा नहीं बचती। इसलिए वे अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

विश्वास की कमी

बढ़ते उम्र और कड़वे अनुभवों के साथ लोग अधिक सतर्क हो जाते हैं। बचपन की तरह किसी पर भी तुरंत भरोसा नहीं कर पाते, जिससे नए रिश्ते नहीं बन पाते।

विशेषज्ञों की राय

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ दोस्तों की संख्या कम होना एक स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे 'सोशल प्रूनिंग' (Social Pruning) कहा जाता है। इस अकेलेपन से बचने के लिए युवाओं को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन में छोटे प्रयास करने होंगे। इसके अलावा युवाओं को किसी हॉबी क्लास, जिम, या बुक क्लब से जुड़ना नए और समान विचारधारा वाले दोस्त बनाने का एक बेहतरीन जरिया हो सकता है। एक्सपर्ट्स ये मानते है कि 50 सतही दोस्तों से बेहतर 2 ऐसे सच्चे दोस्त हैं, जो संकट के समय आपके साथ खड़े होने को तैयार हो सकें।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Pardaphash Hindi