पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीति में इन दिनों एक पोस्टर और सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (RJD Supremo Lalu Prasad Yadav) अपनी बेटी रोहिणी आचार्या (Daughter Rohini Acharya) के साथ सिंगापुर में नजर आए, तो दूसरी तरफ पटना स्थित राजद प्रदेश कार्यालय (RJD Office) के बाहर लगा एक पोस्टर राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर गया।
पोस्टर में रोहिणी आचार्या को लेकर लिखा गया संदेश सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे राजनीतिक संकेत भी तलाशे जा रहे हैं।
लालू और रोहिणी के पोस्टर में छिपे सियासी संकेत! जानें क्या हैं मायने?
रोहिणी आचार्या (Rohini Acharya) ने अपने जन्मदिन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पिता लालू यादव के साथ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि अपने पिता और परिवार के साथ जन्मदिन मनाकर वह स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हैं। पहली नजर में यह एक बेटी का अपने पिता के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव दिखता है, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद पटना में राजद कार्यालय के बाहर जो पोस्टर लगा, उसने राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया।
पोस्टर में क्या लिखा है?
पोस्टर में लालू प्रसाद यादव और रोहिणी आचार्या की स्केच वाली तस्वीर है। पोस्टर में लिखा गया है कि न हौसला टूटा है, न हिम्मत हारी है। मैं लड़ना जानती हूं, अकेले गद्दारों पर भारी हूं। मैं लालू जी की बेटी हूं, मेरा लहू बिहारी और रग-रग में खुद्दारी है। यही वह पंक्ति है, जिसने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल पैदा की है। खासकर 'गद्दारों' शब्द को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं।
आखिर किसके लिए इस्तेमाल हुआ 'गद्दार' शब्द?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पोस्टर में जिस 'गद्दार' शब्द का इस्तेमाल हुआ है, उसका इशारा किसकी ओर है? राजद की ओर से आधिकारिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने भी कहा कि पोस्टर किसने लगाया, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह खुद कार्यालय आते समय पोस्टर देखकर चौंके और इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह के घटनाक्रम हुए हैं, उस संदर्भ में इस पोस्टर को देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया के जरिये देती हैं बड़ा संदेश?
रोहिणी आचार्या लंबे समय तक राजनीति से दूर रहीं, लेकिन लालू यादव को किडनी डोनेट करने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से चुनाव लड़ने के बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ा। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी रही। रोहिणी कई बार सोशल मीडिया के जरिये ही बड़ा संदेश दे देती हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी को मिली हार के बाद रोहिणी ने सोशल मीडिया के जरिये ही तेजस्वी के करीबी संजय यादव और रमीज पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसी प्रकरण के बाद रोहिणी 10 सर्कुलर रोड छोड़कर चली गई थीं। ऐसे में 'अकेले गद्दारों पर भारी हूं' जैसी पंक्ति के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
लालू फैक्टर और भावनात्मक राजनीति
पोस्टर में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोहिणी को सीधे लालू यादव की राजनीतिक विरासत से जोड़ा गया है कि 'मैं लालू जी की बेटी हूं' वाला संदेश सिर्फ पारिवारिक पहचान नहीं, बल्कि राजद के कोर वोटरों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू यादव की लोकप्रियता और विरासत आज भी राजद की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है। ऐसे में रोहिणी को उसी विरासत के साथ प्रस्तुत करना एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है।
फिलहाल सवाल ज्यादा, जवाब कम
राजद कार्यालय के बाहर रातों-रात लगे इस पोस्टर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टर किसने लगाया, किसके इशारे पर लगाया गया और उसमें लिखे संदेश का वास्तविक राजनीतिक अर्थ क्या है, इन सवालों का जवाब अभी किसी के पास नहीं है। लेकिन इतना तय है कि सिंगापुर में पिता के साथ जन्मदिन मनाने वाली रोहिणी आचार्या की तस्वीरों से शुरू हुई चर्चा अब बिहार की राजनीति में नए सियासी संकेतों की तलाश तक पहुंच गई है।

