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आधा घंटा बारिश (व्यंग्य)

आधा घंटा बारिश (व्यंग्य)

रसात में जो बारिश होती है वह होनी होती है। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार बरसात का मौसम संपन्न हो चुका हो, गुलाबी कही जाने वाली ठंड आ रही हो और अचानक आधा घंटा बारिश हो जाए तो ऐसा लगता है किसी प्रसिद्ध व्यक्ति ने रैली में आकर हाथ हिला दिया और जनता में भगदड़ मच गई।

ऐसा माना जाता है कि प्रशासन कभी ध्वस्त नहीं होता क्यूंकि बहुत शक्तिशाली होता है। उसकी काफी शक्तियां तो प्रयोग ही नहीं की जाती, केन्द्रीय सरकार द्वारा दी गई मदद की तरह जो आम तौर पर पूरी प्रयोग नहीं होती। कुछ अखबार वाले भी इस बात को समझते हुए कि प्रशासन ने हमेशा उनके काम आना है और उन्होंने प्रशासन के, समझदारी भरी खबर लगाते हैं कि ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त हो गया। ऐसे में नेताजी भी ज़रूर समझाते हैं कि वाहनों और राहगीरों को ऐसे मौसम में घर से नहीं निकलना चाहिए।

फैशनी रिश्ते (व्यंग्य)

तेज़ बारिश आने से पहले, आसमान के किसी हिस्से से पानी से लबालब बादल आ गए। दिन में ही घनघोर अन्धेरा छा गया लगा शाम, रात में बदल रही है। बारिश होने के दौरान बादल भी गरजे ताकि क्षेत्र में डर का आभास हो। आने जाने वाली गाड़ियों को लाईट जलानी पड़ी। कुछ संवेदनशील लोगों ने ज़िम्मेदारी से वीडियो निर्माण किया। फेसबुक यूटयूब वगैरा पर अपलोड कर दी ताकि दुनिया को पता चल जाए कि बारिश ने उनके घर के आस पास कितना पानी बरसाया है।

आधा घंटा बारिश के कारण, नगर निगम के आपदा कंट्रोल रूम में शिकायतें दर्ज होनी शुरू हो गई। सरकार की अधिकृत सूचना के मुताबिक तो बरसात खत्म हो चुकी थी इसलिए पानी निकासी टीम भी भंग हो गई थी। साईट पर जिन नौसिखियों को भेजा गया वे रास्ते में सोच रहे थे कि बारिश न होती तो कितना अच्छा होता। सुबह से तो धूप खिली रही, तापमान बढ़ गया था, गर्मी लग रही थी लेकिन सिर्फ आधा घंटा बारिश हुई और सब पानी पानी कर दिया।

अब बारिश की संभावना को बुरी बारिश की आशंका माना जाने लगा है। कमबख्त आधा घंटा बारिश ने नालियों का गला घोंट दिया। कबाड़ तो पहले ही उनके किनारे समझदार, पर्यावरण प्रेमी नागरिकों ने सजाया हुआ था। एक पुराना वृक्ष जो पहले से गिरने की कगार पर था सड़क के बीच गिर गया। नियम और अनुशासन में बंधी म्युनिसिपल कमेटी उसे काट नहीं पा रही थी। पेड़ गिर जाने के कारण यातायात रुक गया लेकिन कुछ बहादुर लोग अपने दोपहिया वाहन पेड़ की शाखाओं के नीचे से घसीट कर निकालते रहे। सड़क पर बरसात के मौसम में हुए गड्ढे और गहरे हो गए। वे तो पहले ही मरम्मत मांग रहे थे। खर्चे का बढ़िया अंदाज़ा लगा लिया गया था लेकिन स्वीकृति बाक़ी थी। अब उतने पैसों में काम पूरा नहीं हो पाएगा दोबारा बढ़िया अंदाज़ा लगाना पडेगा। ठेकेदार की खुशी में इजाफा हो गया।

आधा घंटा बारिश ने निवासियों को एक बार फिर से पर्यावरण बारे जगाने की कोशिश की लेकिन किसी ने इस बात का बुरा नहीं माना।

- संतोष उत्सुक

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