Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Allahabad High Court का फैसला, प्रशासनिक देरी के आधार पर छूट नहीं मांग सकते सरकारी विभाग

Allahabad High Court का फैसला, प्रशासनिक देरी के आधार पर छूट नहीं मांग सकते सरकारी विभाग

लाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी विभाग मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कराने के लिए केवल नौकरशाही प्रक्रियाओं, फाइलों की आवाजाही या प्रशासनिक विलंब का हवाला नहीं दे सकते।

अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सरकार और निजी पक्षकार समान स्तर पर हैं तथा विलंब माफी के लिए सरकारी विभागों को ठोस और वास्तविक कारण बताने होंगे। 13 जुलाई को सुरक्षित रखा गया यह फैसला 29 जुलाई को सुनाया गया, जिसे बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी रेल मंत्रालय की उस विशेष अपील को खारिज करते हुए की, जो लखनऊ की वाणिज्यिक अदालत के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। खंडपीठ ने वाणिज्यिक अदालत के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत आपत्तियां दाखिल करने में हुई 28 दिन की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया गया था। मामला मेसर्स गैलेंट इस्पात लिमिटेड और रेल मंत्रालय के बीच रेलवे साइडिंग के लिए आवंटित भूमि के पट्टा किराये से संबंधित विवाद का था।

दिसंबर 2023 में एकल मध्यस्थ ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को पट्टा किराये में संशोधन करने तथा लगभग 1.79 करोड़ रुपये आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया था। रेल मंत्रालय ने इस मध्यस्थीय निर्णय को वाणिज्यिक अदालत में चुनौती दी, लेकिन उसकी याचिका निर्धारित समय-सीमा के बाद दाखिल की गई। इस कारण अदालत ने देरी माफ करने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद रेल मंत्रालय ने उच्च न्यायालय का रुख किया।

गैलेंट इस्पात लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलील दी कि रेल मंत्रालय देरी के लिए कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सका, इसलिए उसे राहत नहीं दी जा सकती। उच्च न्यायालय ने अपील खारिज करते हुए कहा कि न्यायालयों का लगातार यह दृष्टिकोण रहा है कि विलंब माफी ''अपवाद है, नियम नहीं।'' अदालत ने कहा कि सरकारी विभागों को देरी के लिए वास्तविक, ठोस और पर्याप्त कारण प्रस्तुत करने होंगे। वे केवल प्रशासनिक चूक, प्रक्रियागत विलंब या विभागों के बीच फाइलों की आवाजाही का हवाला देकर राहत की अपेक्षा नहीं कर सकते।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prabha Sakshi