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Depression और खराब नींद से हैं परेशान? नई Light Therapy से मूड रहेगा हैप्पी, जानें सब कुछ

Depression और खराब नींद से हैं परेशान? नई Light Therapy से मूड रहेगा हैप्पी, जानें सब कुछ

ज के समय में डिप्रेशन और नींद न आने की समस्याएं काफी आम होती जा रही है। हर कोई इन समस्याओं से काफी परेशान है। अक्सर खराब नींद, लगातार थकान, चिड़चिड़ापन और उदासी न सिर्फ मानसिक हेल्थ जबकि फिजिकल हेल्थ पर असर पड़ता है।

आजकल 'लाइट थेरेपी' काफी चर्चा में बनीं हुई है, इस तकनीक के जरिए मूड में सुधार करने और नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद करती है।

क्या है लाइट थेरेपी?

यह थेरेपी एकदम मॉर्डन ट्रीटमेंट है, जिससे व्यक्ति विशेष प्रकार के कृत्रिम प्रकाश यानी के ब्राइट लाइट के संपर्क में नियंत्रित समय तक बैठता है। आमतौर पर एक प्रकार से विशेष लाइट थेरेपी बॉक्स का इस्तेमाल कर सकता है, जो नेचुरल डे लाइट की नकल करता है।

अमेरिका के नेशनल इंस्ट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के मुताबिक, लाइट थेरेपी खासतौर पर सिजनल एफेटिव डिसऑर्डर में उपयोगी पाई गई है, यह मौसम में बदलाव के दौरान होने वाले हर प्रकार के डिप्रेशन है।

दरअसल, इस थेरेपी का मुख्य उद्देश्य शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) या सर्कैडियन रिद्म को प्रभावित करना होता है। बता दें कि, यह आंतरिक प्रणाली है जो हमारे सोने-जागने के चक्र, हार्मोन उत्पादन और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करता है।

लाइट थेरेपी मूड और नींद को कैसे प्रभावित करती है?

हमारा शरीर रोशनी के असर को जल्दी महसूस करता है। सुबह की धूप हमारे दिमाग को यह संकेत देती है कि अब उठने और काम करने का समय हो गया है। इससे शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन सही तरीके से काम करते हैं।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, रोज सुबह कुछ समय तक प्राकृतिक रोशनी में रहने से शरीर की जैविक घड़ी संतुलित रहती है और नींद का समय भी बेहतर होता है। मेलाटोनिन अच्छी नींद लाने में मदद करता है, जबकि सेरोटोनिन मन को खुश और शांत रखने में सहायक होता है। अगर शरीर को पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती, तो इन हार्मोनों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे नींद और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

स्लीप डिसऑर्डर और अल्जाइमर के लक्षणों में आराम मिलता है

साइंस डायरेक्ट की स्टडी में पता चला है कि लाइट थेरेपी ने डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में सकारात्मक प्रभाव दिखाया, विशेषतौर पर उन मरीजों में जो इनसोम्निया, स्लीप डिसऑर्डर, और अल्जाइमर के कारण परेशान थे। असल में एक अन्य मेटा-एनालिसिस में पाया गया है कि लाइट थेरेपी नींद की गुणवत्ता में सुधार कर सकती हैं और कुछ लोगों में नींद आने में लगने का समय को कम कर देती है।

लाइट थेरेपी कराते समय क्या सावधानी बरतें?

इस थेरेपी का फायदा तफबी मिलेगा जब इसका सही इस्तेमाल किया जाए। मैयो क्लिनिक के अनुसार, सुरक्षित प्रयोग के लिए प्रमाणित Light Therapy Devices का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको पहले को ई मानसिक या आंखो से जुड़ी कोआई बीमारी है, तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरुर लें।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prabha Sakshi