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Donald Trump के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने खटखटाई अदालत

Donald Trump के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने खटखटाई अदालत

सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, चार अगस्त डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं।

अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे। ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के वैश्विक आयात शुल्क के स्थान पर लागू किए गए हैं।

इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, ''उच्चतम न्यायालय में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।'' भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।

बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, ''प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prabha Sakshi