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Indian Railway के First AC Coupe को सजा कर बनाया Honeymoon Suite, Video सामने आते ही रेलवे ने की सख्त कार्रवाई

Indian Railway के First AC Coupe को सजा कर बनाया Honeymoon Suite, Video सामने आते ही रेलवे ने की सख्त कार्रवाई

भी कभी सफर केवल मंजिल तक पहुंचने का जरिया नहीं होता, बल्कि वह यादों की ऐसी कहानी बन जाता है जिसे लोग बरसों तक याद रखते हैं। फूलों की खुशबू, रंग बिरंगे गुब्बारे, गुलाब की पंखुड़ियों से सजा एक कूपे और प्यार का इजहार करता संदेश।

मानो किसी फिल्म का सबसे रोमांटिक दृश्य चल रहा हो। लेकिन इस बार यह दृश्य किसी सिनेमाघर के परदे पर नहीं, बल्कि चलती रेलगाड़ी के प्रथम श्रेणी वातानुकूलित कूपे में दिखाई दिया। जैसे ही इसका दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आया, देखते ही देखते यह चर्चा, बहस और मजाक का विषय बन गया।

यह घटना छह जुलाई को महाराष्ट्र के जालना रेलवे स्टेशन से रवाना हुई नांदिग्राम रेलगाड़ी में हुई। बताया गया कि एक नवविवाहित दंपति ने अपने प्रथम श्रेणी वातानुकूलित कूपे को विशेष यात्रा का रूप देने के लिए एक सजावट कंपनी की सेवाएं लीं। रेलगाड़ी के चलने से पहले कूपे को गुब्बारों, फूलों, हजारों गुलाब की पंखुड़ियों और प्यार का संदेश लिखकर सजाया गया। जब इसका दृश्य सोशल मीडिया पर पहुंचा तो किसी ने इसे सुहागरात केबिन कहा, तो किसी ने इसे चलती फिरती प्रेम कहानी का नाम दे दिया।

हालांकि यह रोमांटिक दृश्य भारतीय रेल प्रशासन को रास नहीं आया। दक्षिण मध्य रेल के अधिकारियों ने इसे सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक माना। अधिकारियों के अनुसार सजावट करने वाली कंपनी बिना किसी अधिकृत अनुमति के जालना स्टेशन पर रेल के प्रथम श्रेणी डिब्बे में पहुंच गई। रेल प्रशासन का कहना है कि बाहरी लोगों का इस प्रकार बिना अनुमति प्रवेश करना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर मामला है।

इस घटना के बाद डयूटी पर तैनात यात्रा टिकट परीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बाहरी व्यक्ति को प्रथम श्रेणी डिब्बे तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली और इस लापरवाही के लिए कौन कौन जिम्मेदार है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर, सजावट सेवा वाली कंपनी का कहना है कि प्रथम श्रेणी का कूपे पहले से दंपति के नाम आरक्षित था। कंपनी का कहना है कि उसकी टीम पहले ही पहुंचकर कूपे को सजा चुकी थी। उनका यह भी कहना है कि उन्हें इस प्रकार की सजावट के लिए किसी अलग सरकारी अनुमति की आवश्यकता होने की जानकारी नहीं थी। बताया गया कि दंपति छत्रपति संभाजीनगर से सड़क मार्ग से जालना पहुंचे और वहीं से रेलगाड़ी में सवार हुए।

यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने कहा कि जब दंपति ने विधिवत टिकट लेकर निजी कूपे आरक्षित कराया था, तब उसे अपनी पसंद के अनुसार सजाने में क्या आपत्ति हो सकती है। कई लोगों का मानना था कि रेल को कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की बजाय ऐसी सजावट की सशुल्क सुविधा ही शुरू कर देनी चाहिए। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि निलंबित कर्मचारी को दंड देने की बजाय सम्मान मिलना चाहिए क्योंकि इससे किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इस घटना का विरोध भी किया। उनका कहना था कि सार्वजनिक परिवहन में इस तरह की सजावट नियमों के विरुद्ध है और सुरक्षा व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। कुछ लोगों ने दंपति और संबंधित कर्मचारियों दोनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई।

बहरहाल, फिलहाल यह मामला केवल एक रोमांटिक सजावट तक सीमित नहीं रह गया है। इसने सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा नियमों और निजी स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर विभागीय जांच पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि प्रेम की इस अनोखी कहानी में नियमों की अनदेखी किस स्तर तक हुई और जिम्मेदारी आखिर किसकी बनती है।


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