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महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकपाल की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकपाल की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, एक सितंबर उच्चतम न्यायालय ने कथित रूप से नकदी लेकर सवाल पूछने को लेकर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ मामले में लोकपाल की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई मंगलवार को स्थगित कर दी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि 24 जुलाई को इन याचिकाओं में पक्षकार बनाए गए केंद्र की ओर से सुनवाई के दौरान कोई पेश नहीं हुआ। पीठ ने कहा, ''केंद्र की ओर से कोई पेश नहीं हुआ है।

जरूरत होने पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए उसे एक और अवसर दिया जाता है। मामले की सुनवाई स्थगित की जाती है।'' पीठ ने गृह मंत्रालय को 24 जुलाई को इन याचिकाओं में पक्षकार बनाया था। इससे पहले 13 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 19 दिसंबर 2025 के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी थी जिसमें लोकपाल को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को मोइत्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की मंजूरी देने पर विचार करने को कहा गया था।

उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ लोकपाल की याचिकाओं पर मोइत्रा, सीबीआई और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद एवं शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे को नोटिस जारी किए थे। लोकपाल ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 में आरोपपत्र दाखिल करने और अभियोजन शुरू करने के लिए अलग-अलग मंजूरी देने का प्रावधान नहीं है। उच्च न्यायालय ने पिछले साल 19 दिसंबर को लोकपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें मोइत्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के लिए सीबीआई को मंजूरी दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले के अनुच्छेद 89 में कहा था, ''लोकपाल से अनुरोध है कि वह आज से एक महीने के भीतर लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत मंजूरी देने के सवाल पर, ऊपर की गई व्याख्या के अनुसार, अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप विचार करे।'' कथित रूप से नकदी लेकर सवाल पूछने का मामला इस आरोप से जुड़ा है कि मोइत्रा ने एक कारोबारी से नकदी और उपहार लेने के बदले लोकसभा में सवाल पूछे थे। सीबीआई ने पिछले साल जुलाई में मोइत्रा और कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से जुड़े इस मामले में अपनी रिपोर्ट लोकपाल को सौंपी थी। एजेंसी ने लोकपाल के संदर्भ पर 21 मार्च 2024 को दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

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