Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Mayawati की जमीन पर Akhilesh Yadav की एंट्री, UP में बड़ा खेल शुरू, सपा के Dalit Card से BJP भी हैरान

Mayawati की जमीन पर Akhilesh Yadav की एंट्री, UP में बड़ा खेल शुरू, सपा के Dalit Card से BJP भी हैरान

त्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों समाजवादी पार्टी ने ऐसा दांव चला है, जिसने बहुजन समाज पार्टी की बेचैनी बढ़ा दी है और भारतीय जनता पार्टी को भी माथा खुजलाने पर मजबूर कर दिया है।

बात सिर्फ टिकट बांटने की नहीं है, बल्कि उस नई सामाजिक बिसात की है, जिस पर अखिलेश यादव अब दलित, पिछड़ा और मुस्लिम समीकरण को नए अंदाज में जमाने की कोशिश कर रहे हैं।

हम आपको बता दें कि सियासी गलियारों में चर्चा गर्म है कि समाजवादी पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में लगभग सौ दलित उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। इनमें सामान्य सीटों पर भी दलित चेहरों को मौका देने की रणनीति शामिल है। समाजवादी पार्टी का मानना है कि अगर बहुजन समाज पार्टी की पारंपरिक जमीन पर सेंध लगानी है तो केवल भाषणों से काम नहीं चलेगा, बल्कि टिकट वितरण में भी साहस दिखाना होगा।

दरअसल, यह पूरी कवायद उस बदले हुए राजनीतिक माहौल का नतीजा है, जिसमें बहुजन समाज पार्टी धीरे धीरे अपने पुराने प्रभाव से दूर होती दिखाई दे रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता तक नहीं खुला और उसका मत प्रतिशत भी तेजी से नीचे आया। उधर समाजवादी पार्टी ने यह समझ लिया है कि अगर दलित मतदाता का एक हिस्सा भी उसके साथ मजबूती से आ गया, तो उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता और आसान हो सकता है।

इसी सोच के तहत पार्टी अब आरक्षित सीटों तक सीमित रहने की बजाय सामान्य सीटों पर भी दलित प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जहां समाजवादी पार्टी का संगठन बहुत मजबूत नहीं है, वहां दलित उम्मीदवारों को उतारकर नया सामाजिक समीकरण बनाया जाएगा। यानी जहां जमीन कमजोर है, वहां जातीय गणित से जीत का पुल तैयार करने की कोशिश होगी।

दिलचस्प बात यह है कि यह प्रयोग पूरी तरह नया भी नहीं है। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कई दलित उम्मीदवार उतारे थे और उसका फायदा भी मिला। अयोध्या, मेरठ और फैजाबाद जैसी सीटों पर पार्टी ने दलित चेहरों को मौका देकर राजनीतिक संदेश दिया था कि अब पार्टी केवल यादव मुस्लिम पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहती।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अखिलेश यादव अब उस छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें समाजवादी पार्टी को केवल यादव और मुस्लिम मतों की पार्टी माना जाता था। यही कारण है कि पार्टी अब दलित समाज में लगातार संवाद बढ़ा रही है। पंचायत स्तर से लेकर विधान परिषद तक प्रतिनिधित्व का नया खाका तैयार किया जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के भीतर भी यह समझ बन रही है कि बहुजन समाज पार्टी के कमजोर पड़ने से जो राजनीतिक खालीपन बना है, उसे भरने का यह सबसे सही समय है। पार्टी नेताओं का दावा है कि दलित समाज का एक हिस्सा अब नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में है। ऐसे में अगर सम्मानजनक भागीदारी दी जाए, तो यह वर्ग स्थायी रूप से नए गठजोड़ की तरफ आ सकता है।

उधर, भारतीय जनता पार्टी भी इस बदलते समीकरण को लेकर सतर्क दिखाई दे रही है। भाजपा को मालूम है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाता सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि चुनावी दिशा तय करने वाला निर्णायक वर्ग है। इसी कारण भाजपा लगातार अपने दलित संपर्क अभियान को तेज कर रही है और यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसका सामाजिक विस्तार अभी भी कायम है।

बहुजन समाज पार्टी के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। कभी दलित राजनीति की सबसे बड़ी धुरी रही पार्टी अब दो तरफा दबाव में है। एक तरफ भाजपा उसका परंपरागत वोट बैंक खींच रही है, दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी नए अंदाज में दलित नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

राजनीति के पुराने खिलाड़ी मानते हैं कि यह पूरा खेल केवल टिकटों का नहीं, बल्कि प्रतीकों और संदेशों का है। अखिलेश यादव यह जताना चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी अब केवल एक जाति विशेष की पार्टी नहीं रही। वहीं भाजपा यह साबित करने में जुटी है कि उसका सामाजिक समीकरण अभी भी सबसे व्यापक है। और बहुजन समाज पार्टी इस कोशिश में लगी है कि उसका कोर मतदाता पूरी तरह छिटकने न पाए।

बहरहाल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह नया दौर बेहद दिलचस्प होने वाला है। अब चुनावी मंचों पर केवल विकास और वादों की बात नहीं होगी, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व की नई पटकथा भी लिखी जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि दलित राजनीति अब केवल एक पार्टी की जागीर नहीं रही। साइकिल, कमल और हाथी तीनों अब उसी मैदान में उतर चुके हैं, जहां हर वोट के पीछे पूरा सामाजिक गणित छिपा है।

-नीरज कुमार दुबे


Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prabha Sakshi