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Ram Mandir दान चोरी: रिश्तेदारों के Bank Accounts से घुमाया कैश, SIT जांच में खुली पूरी साज़िश

Ram Mandir दान चोरी: रिश्तेदारों के Bank Accounts से घुमाया कैश, SIT जांच में खुली पूरी साज़िश

राम मंदिर के लिए दिए गए दान की कथित चोरी के मामले में गिरफ्तार तीन लोगों ने चोरी के पैसे को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बैंक खातों के ज़रिए ठिकाने लगाया। इससे भक्तों के चढ़ावे को हड़पने और पैसे के लेन-देन का सुराग मिटाने की एक सोची-समझी साज़िश का पता चला है।

ये खुलासे ऐसे समय में हुए हैं जब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच का दायरा बढ़ रहा है, जिसमें मंदिर के दान प्रबंधन सिस्टम और इसकी निगरानी में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी अनुकूल मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे ने पूछताछ के दौरान माना कि शक से बचने के लिए उन्होंने चोरी की नकदी को अपने पास वापस लाने से पहले अपने करीबी साथियों के खातों के ज़रिए घुमाया था। बताया जा रहा है कि जांचकर्ताओं ने बैंक रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके उनके दावों की कुछ बातों की पुष्टि की है।

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इसके बाद, आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के 30 बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया। डोनेशन की चोरी के मामले में कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद तीनों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में ले लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने माना कि वे दूसरे आरोपी रामाशंकर यादव उर्फ ​​टिन्नू और डोनेशन-गिनती के इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव के साथ मिलकर चढ़ावे से कैश चुराते थे और उस पैसे को ठिकाने लगाते थे। सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने यह भी बताया कि उन्होंने चोरी का कैश और गहने कहाँ छिपाए थे। आरोपियों से जुड़ी जगहों से पहले ही 79 लाख रुपये कैश और गहने बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस ने अविनाश शुक्ला को राम मंदिर के दान-गिनती सिस्टम से लगभग 70 बार चोरी करने के कथित 40-दिन के रैकेट में मुख्य आरोपी के तौर पर पहचाना है। शुक्ला समेत अब तक आठ लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।

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जांच करने वालों का मानना ​​है कि चोरियां पहले छोटी रकम से शुरू हुईं और बाद में एक व्यवस्थित चोरी का रूप ले लिया। जांच के मुताबिक, आरोपी दान की गिनती करते समय 500 रुपये के नोट अपनी मोज़ों, जेबों और कपड़ों के अंदर छिपा लेते थे; वे कमज़ोर तलाशी प्रक्रिया और खराब CCTV निगरानी का फ़ायदा उठाते थे। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें लगा था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे क्योंकि सुरक्षा जांच ढीली थी। उन्होंने कथित तौर पर माना कि जब भी मौका मिलता, वे ज़्यादा से ज़्यादा कैश चुरा लेते थे और दावा किया कि उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों की सिफारिश से नौकरी मिली थी। सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान अनिल मिश्रा का नाम भी सामने आया। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों से जुड़ी जगहों से पहले ही 79 लाख रुपये कैश और गहने बरामद कर लिए हैं, और नई जानकारियों के आधार पर और भी बरामदगी की उम्मीद है।

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