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RBI Governor का बड़ा ऐलान: GDP Forecast बढ़ाकर 6.7% किया, Monetary Policy में Repo Rate 5.25% पर बरकरार

RBI Governor का बड़ा ऐलान: GDP Forecast बढ़ाकर 6.7% किया, Monetary Policy में Repo Rate 5.25% पर बरकरार

भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर नीतिगत ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह लगातार तीसरी बार है जब आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के सामने चुनौती बनी हुई हैं।

मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने बताया कि मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन से देश की आर्थिक गतिविधियों को लगातार समर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन केंद्रीय बैंक के अनुमान से बेहतर रहा है।

बता दें कि आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ बनाए रखा है। गवर्नर ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में खपत बढ़ने की संभावना है, क्योंकि सेवा क्षेत्र लगातार मजबूती दिखा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और अल-नीनो से जुड़े जोखिम आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया का संघर्ष प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर असर डाल रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।

आरबीआई ने महंगाई को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत बताई है। संजय मल्होत्रा के अनुसार, निकट भविष्य में कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के कारण खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि उनका मानना है कि तीसरी तिमाही में ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद महंगाई में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि फिलहाल महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतें हैं।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। गवर्नर ने बताया कि जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है और ऋण वृद्धि भी मजबूत बनी हुई है।

इस बीच आरबीआई ने रुपये पर बढ़ते दबाव को लेकर भी चिंता जताई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेश की निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और डॉलर की मजबूती के कारण रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। वर्ष 2026 में अब तक रुपये में करीब सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। वहीं ईरान से जुड़े संघर्ष शुरू होने के बाद इसमें और कमजोरी देखने को मिली है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियों के बीच सतर्क नीति अपनाना फिलहाल सबसे उपयुक्त कदम हैं।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prabha Sakshi