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'सभ्यता समाप्त कर दूँगा' से अचानक 'संघर्षविराम' पर कैसे उतर आये ट्रंप, क्या हुआ था अंतिम क्षणों में?

'सभ्यता समाप्त कर दूँगा' से अचानक 'संघर्षविराम' पर कैसे उतर आये ट्रंप, क्या हुआ था अंतिम क्षणों में?

मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक बड़ा दांव खेलते हुए ईरान पर होने वाले हमलों को दो हफ्तों के लिए रोकने का एलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया सांस रोके खड़ी थी और ट्रंप खुद चेतावनी दे चुके थे कि अगर समझौता नहीं हुआ तो पूरी सभ्यता मिट सकती है।

हम आपको बता दें कि यह युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था और अब तक हजारों लोगों की जान ले चुका है। ईरान, लेबनान, इराक, इजराइल और कई अन्य देशों में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया। लेकिन अब अचानक युद्ध विराम की इस घोषणा ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। सवाल यह है कि क्या यह सच में शांति की शुरुआत है या सिर्फ एक रणनीतिक विराम हुआ है?

ट्रंप का यू टर्न या सोची समझी चाल

डोनाल्ड ट्रंप ने पहले धमकी दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला तो अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचे को तबाह कर देगा। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है। लेकिन अचानक वही ट्रंप अब युद्ध रोकने की बात कर रहे हैं और इसे अपनी पूरी जीत बता रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि यह सौ प्रतिशत जीत है और इसमें कोई शक नहीं। लेकिन असलियत यह है कि यह फैसला दबाव में लिया गया या रणनीति के तहत, इस पर दुनिया भर के विश्लेषक बंटे हुए हैं।

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पाकिस्तान बना पर्दे के पीछे का असली खिलाड़ी

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली भूमिका पाकिस्तान की रही। इस्लामाबाद में 10 अप्रैल से बातचीत शुरू होने की बात कही गई है। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर एक ऐसा मंच तैयार किया जहां दोनों पक्ष बातचीत के लिए राजी हुए। पाकिस्तान की इस कूटनीतिक चाल ने उसे अचानक वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति में ला दिया है। तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों के साथ मिलकर पाकिस्तान ने जो दबाव बनाया, उसी का नतीजा यह युद्ध विराम माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना असली गेम चेंजर

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि युद्ध विराम तभी लागू होगा जब होर्मुज जलडमरूमध्य खोला जाएगा। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। इस समय करीब 130 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 46 मिलियन बैरल रिफाइंड ईंधन खाड़ी में फंसा हुआ है। लगभग 200 टैंकर समुद्र में खड़े इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही रास्ता खुलेगा, तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और बाजार में हलचल तेज होगी। यही वजह है कि युद्ध विराम की खबर आते ही तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। यह साफ संकेत है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस संघर्ष से कितनी बुरी तरह प्रभावित हो चुकी थी।

इजराइल का समर्थन, लेकिन अधूरी सहमति

इजराइल ने अमेरिका के फैसले का समर्थन किया है, लेकिन एक बड़ी शर्त के साथ। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ कहा है कि यह युद्ध विराम लेबनान पर लागू नहीं होगा। यही सबसे बड़ी चिंता की बात है। लेबनान पहले ही इस संघर्ष में झुलस चुका है। हाल ही में सिदोन शहर में एक कैफे पर हुए हमले में कम से कम आठ लोग मारे गए। हजारों लोग पहले ही अपनी जान गंवा चुके हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले दावा किया था कि लेबनान भी इस समझौते में शामिल होगा, लेकिन इजराइल के बयान ने इस दावे को झटका दे दिया है। इसका मतलब साफ है कि जंग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

मौत का आंकड़ा और भयावह सच्चाई

इस युद्ध ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। ईरान में हजारों लोग मारे गए हैं। लेबनान में बच्चों सहित बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं। इराक, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, सीरिया, बहरीन, ओमान और सऊदी अरब तक इस आग की चपेट में आए हैं।

ईरान का दस सूत्रीय प्लान और परमाणु सवाल

ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए दस सूत्रीय योजना पेश की है। हालांकि इसके सभी बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह साफ है कि इसमें परमाणु कार्यक्रम भी शामिल है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के परमाणु सामग्री का पूरा ध्यान रखा जाएगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि यह कैसे होगा। यही वह बिंदु है जहां सबसे ज्यादा संदेह और तनाव बना हुआ है।

जेडी वेंस की एंट्री और सत्ता का खेल

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक अहम चेहरा बनकर उभरे हैं। वह पहले युद्ध के खिलाफ माने जाते थे और अब बातचीत में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ईरान भी उन्हें बाकी अमेरिकी नेताओं के मुकाबले ज्यादा संतुलित मानता है। यही वजह है कि बातचीत की दिशा अब उनके इर्द गिर्द घूम रही है। विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस खुद को भविष्य के नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं और यह युद्ध उनके लिए एक राजनीतिक मंच बन गया है।

क्या यह शांति टिकेगी या फिर नई तबाही का संकेत

यह दो हफ्ते का युद्ध विराम असल में एक परीक्षा है। अगर बातचीत सफल रही तो यह इतिहास बदल सकता है। लेकिन अगर यह असफल हुआ तो जो तबाही अभी तक देखी गई है, उससे कई गुना ज्यादा भयावह स्थिति पैदा हो सकती है।

बहरहाल, ट्रंप की चेतावनी अब भी हवा में तैर रही है कि पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है। सवाल यह है कि क्या दुनिया इस बार इस चेतावनी को गंभीरता से लेगी या फिर एक और युद्ध की ओर बढ़ेगी। अभी के लिए बंदूकें शांत हैं, लेकिन सन्नाटा बेहद खतरनाक है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prabha Sakshi