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टूट गया भ्रम, ईरानियों ने जनाजे में दिखाया ऐसा कुछ, ट्रंप के उड़ गए तोते!

टूट गया भ्रम, ईरानियों ने जनाजे में दिखाया ऐसा कुछ, ट्रंप के उड़ गए तोते!

रान की राजधानी तेहरान में शनिवार को देश के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई को अंतिम विदाई देने के लिए लाखों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ग्रैंड मुसल्ला से लेकर अंतिम यात्रा के पूरे मार्ग तक लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली।

काले कपड़े पहने पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। शिया परंपरा के अनुसार शोक व्यक्त करते हुए लोग मातम मना रहे थे और लब्बैक या खामनेई अमेरिकी मुर्दाबाद तथा इजराइल मुर्दाबाद जैसे नारे लगा रहे थे। पूरे तेहरान में राष्ट्रीय शोक का माहौल दिखाई दिया। अंतिम यात्रा में सिर्फ आम नागरिक ही नहीं बल्कि ईरान के शीर्ष राजनीतिक सैन्य और धार्मिक नेताओं के साथ-साथ कई देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सभी विदेशी प्रतिनिधियों और दुनिया भर से संवेदनाएं व्यक्त करने वाले देशों का धन्यवाद करते हुए कहा कि कठिन समय में ईरान के साथ खड़े रहने वाले सभी मित्र देशों का समर्थन हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता अपने नेताओं की शहादत को कभी नहीं भूलेगी और अपने देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

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खामनेई की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। पिछले कुछ समय से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि लगातार सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंधों और आंतरिक असंतोष के चलते ईरान में बड़े पैमाने पर विद्रोह भड़क सकता है और सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। लेकिन अंतिम यात्रा में दिखाई दी अभूतपूर्व भीड़ ने एक अलग तस्वीर पेश की। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को कई विश्लेषक इस संकेत के रूप में देख रहे हैं कि खामनेई की मौत के बाद उनके समर्थकों और ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के बीच एकजुटता और मजबूत हुई है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। बीते वर्षों में अमेरिका और इजराइल पर कई बार यह आरोप लगते रहे हैं कि वे ईरान पर राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाकर वहां की सत्ता व्यवस्था को कमजोर करना चाहते हैं। ऐसे माहौल में खामनेई की हत्या और उसके बाद अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ ने पूरी घटनाक्रम को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है।

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ईरान के भीतर अब यह भावना और ज्यादा मजबूत होती हुई दिखाई दे रही है कि देश बाहरी दबाव का सामना एकजुट होकर करेगा। जानकार मानते हैं कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। ईरान के भीतर बदले की मांग तेज हो सकती है और सरकार पर जवाबी कारवाई का दबाव बन सकता है। हालांकि भविष्य में ईरान क्या कदम उठाएगा यह उसके नए नेतृत्व और सुरक्षा रणनीति पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि खामनेई की मौत ने मध्य पूर्व की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अली खामनेई की अंतिम यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सिर्फ धार्मिक या राजनीतिक अंतिम संस्कार नहीं था बल्कि शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक संदेश का भी एक बड़ा मंच बन गया। लाखों लोगों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि ईरान इस घटना को केवल एक नेता के रूप में नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय सम्मान और संप्रभुता से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और मध्य पूर्व के बदलते घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

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ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई ने की अंतिम विदाई में दुनिया के कई देशों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने शनिवार को बताया कि 70 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने तेहरान पहुंचकर हमने को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक अंतिम संस्कार समारोह नहीं था बल्कि ईरान और दुनिया के कई देशों के बीच मौजूद रिश्तों का भी महत्वपूर्ण संदेश था। अरागची जी ने अपने संदेश में कहा कि ईरान उन सभी 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करता है जिन्होंने दिवंगत सर्वोच्च नेता आया अली खामनेई को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए जनाजे में हिस्सा लिया। उन्होंने विशेष रूप से अरब देशों के प्रतिनिधियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भाईचारे और सम्मान के लिए ईरान उनका आभारी है।

विदेश मंत्री ने कहा यह ऐतिहासिक अवसर हमारे आपसी संबंधों के इतिहास में हमेशा के लिए याद रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि समारोह में तुर्कमेनिस्तान, इराक, अर्मेनिया, ताजाकिस्तान, पाकिस्तान, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र, अज़रबैजान, बांग्लादेश, उज़्बेकिस्तान, बेलारूस, किरगिस्तान, निकरागवा, कांगो, बुर्किनाफासो, मिस्र, ओमान, तुर्की, सऊदी अरब और रूस समेत कई देशों के प्रतिनिधि मंडल इसमें शामिल हुए। इसके अलावा भारत का प्रतिनिधिमंडल भी ईरान में आयतुल्ला अली खामनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुआ। इन देशों की मौजूदगी को ईरान के साथ उनके कूटनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग का संकेत माना जा रहा है। विशेष रूप से सऊदी अरब और अन्य अरब देशों की भागीदारी ने भी ध्यान खींचा। हाल के वर्षों में ईरान और कई अरब देशों के बीच संबंधों में सुधार देखने को मिला। ऐसे में खामनेई के जनाजे में उनकी मौजूदगी को पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक तस्वीर के रूप में भी देखा जा रहा है। तेहरान में आयोजित अंतिम विदाई समारोह में लाखों ईरानी नागरिक भी सड़कों पर उमड़े। राजधानी की सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दी। जिन्होंने अपने दिवंगत नेता को भावुक माहौल में अंतिम विदाई दी।

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