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Nishant Sharma Case: अदालती आदेश से मिली सुरक्षा पर ₹68 लाख का रिकवरी नोटिस, कारोबारी निशांत शर्मा बोले- 'अदालत जाऊंगा'

Nishant Sharma Case: अदालती आदेश से मिली सुरक्षा पर ₹68 लाख का रिकवरी नोटिस, कारोबारी निशांत शर्मा बोले- 'अदालत जाऊंगा'

Nishant Sharma Case: हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक कार्यालय द्वारा पालमपुर के कारोबारी निशांत शर्मा और उनके परिवार को दी गई पुलिस सुरक्षा वापस लेने का प्रस्ताव और इसके बदले 68,60,502 रुपये की राशि जमा करवाने का रिकवरी नोटिस जारी किए जाने के बाद, अब मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है।

निशांत शर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पुलिस की इस कार्रवाई को गैर-कानूनी और मनमाना बताया है। उनका कहना है कि जिस सुरक्षा को अदालतों के आदेशों के बाद दिया गया था, उसे वापस लेने और उसके बदले इतनी बड़ी रकम की मांग करना गंभीर कानूनी सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ कानूनी और संवैधानिक कदम उठाएंगे।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से जुड़ा है मामला
निशांत शर्मा और उनके परिवार की सुरक्षा का मामला पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। बताया गया है कि 16 नवंबर 2023 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने CRWP No. 14 of 2023 मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए निशांत शर्मा और उनके परिवार को पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद 19 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कांगड़ा की तत्कालीन एसपी को सुरक्षा व्यवस्था में हस्तक्षेप न करने के निर्देश दिए थे। शीर्ष अदालत ने एडीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) को सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।

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निशांत शर्मा बोले-यह कोई विशेष सुविधा नहीं थी
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार निशांत शर्मा का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को मिली पुलिस सुरक्षा किसी विशेष सुविधा या व्यक्तिगत लाभ के तौर पर नहीं दी गई थी। उनके अनुसार, यह सुरक्षा उनके जीवन और परिवार की सुरक्षा को देखते हुए अदालतों के निर्देशों और सुरक्षा आकलन के आधार पर दी गई थी।

उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर अब पुलिस सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया जा रहा है तो पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर सुरक्षा खतरे में क्या बदलाव आया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार की संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति (JSRC) ने भी पहले सुरक्षा की जरूरत को स्वीकार किया था।

लगातार धमकियों और हमलों का आरोप
निशांत शर्मा का आरोप है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व डीजीपी संजय कुंडू द्वारा किए गए हस्तक्षेप का मामला पहले ही न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा है। शर्मा का आरोप है कि मामले से जुड़े कुछ पहलुओं में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

सुरक्षा वापस लेने और रकम मांगने पर उठाए सवाल
निशांत शर्मा ने सवाल उठाया है कि आखिर अब सुरक्षा वापस लेने का प्रस्ताव किस आधार पर तैयार किया गया। उन्होंने पूछा कि क्या इस संबंध में कोई नया सुरक्षा आकलन किया गया है और क्या फैसला लेने से पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों को संबंधित अधिकारियों के सामने रखा गया था।

सबसे बड़ा सवाल 68.60 लाख रुपये की रिकवरी नोटिस को लेकर उठाया जा रहा है। शर्मा का कहना है कि अदालतों के आदेशों और सुरक्षा खतरे को देखते हुए दी गई पुलिस सुरक्षा के बदले अब इतनी बड़ी रकम की मांग किस कानूनी आधार पर की जा रही है।

फिर अदालत जाने की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में निशांत शर्मा और उनके परिवार को खतरा होने की स्थिति में दोबारा हाईकोर्ट जाने की छूट दी थी। निशांत शर्मा ने कहा कि वे इस मामले में किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और पुलिस सुरक्षा वापस लेने के प्रस्ताव तथा रिकवरी नोटिस को कानूनी चुनौती देंगे।

उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर डीजीपी कार्यालय, एडीजीपी (कानून एवं व्यवस्था), सुरक्षा समीक्षा से जुड़े अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग को लेकर सक्षम अदालत या संवैधानिक मंच का रुख किया जाएगा।

निशांत शर्मा का कहना है कि वह पहले से ही एक ऐसे मामले की पैरवी कर रहे हैं, जिसमें सीबीआई जांच के आदेश दिए जा चुके हैं और कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। ऐसे में पुलिस सुरक्षा वापस लेने और उसके बदले लाखों रुपये की मांग किए जाने के फैसले ने मामले को एक नया कानूनी और राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

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