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शिमला में आज प्री-बिड सम्मेलन, Himachal Pradesh Lottery पर सुक्खू सरकार और विपक्ष आमने-सामने

शिमला में आज प्री-बिड सम्मेलन, Himachal Pradesh Lottery पर सुक्खू सरकार और विपक्ष आमने-सामने

Himachal Pradesh Lottery: हिमाचल प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था को फिर से बहाल करने की सुक्खू सरकार की योजना को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में आज, शनिवार (29 अगस्त) को शिमला स्थित निदेशक कोषागार, लेखा व लॉटरीज निदेशालय द्वारा एक प्री-बिड सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में लॉटरी संचालन के लिए इच्छुक बोलीदाता भाग लेंगे। सरकार की मंशा इस व्यवस्था के जरिए राज्य को सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये तक का राजस्व उपलब्ध कराने की है।

तय कार्यक्रम के अनुसार, लॉटरी संचालन के लिए ऑनलाइन बोली जमा करने की अंतिम तिथि 14 सितंबर निर्धारित की गई है, जबकि टेक्निकल बिड 15 सितंबर को खोली जाएगी। वित्तीय बोली खुलने के 30 दिनों के भीतर सफल बोलीदाता को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LOA) जारी कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यदि प्री-बिड सम्मेलन में आवेदकों की संख्या कम रहती है, तो सरकार एक और बैठक आयोजित करने पर विचार कर सकती है।

सरकार की ओर से जारी नियमों के तहत लॉटरी का संपूर्ण नियंत्रण राज्य सरकार के पास ही रहेगा। सरकार कागजी और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से इसका संचालन कर सकेगी। प्रत्येक टिकट पर सरकारी लोगो, मुहर, विशिष्ट संख्या, निदेशक के डिजिटल हस्ताक्षर और एमआरपी अंकित होगी। ऑनलाइन लॉटरी के लिए सेंट्रल कंप्यूटर सर्वर और डिजिटल निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी ताकि सभी लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।

टेंडर प्रक्रिया के लिए सरकार ने बेहद कड़े आर्थिक मानदंड तय किए हैं। बोलीदाता के लिए 50 करोड़ रुपये की न्यूनतम शुद्ध संपत्ति (नेट वर्थ) और किसी राज्य में 2 साल तक लॉटरी चलाने का अनुभव होना अनिवार्य है। इसके अलावा, बोलीदाता को 5 लाख रुपये गैर-वापसी योग्य टेंडर शुल्क, 2 करोड़ रुपये बयाना राशि, 5 करोड़ रुपये टेंडर फीस, और 10 करोड़ रुपये की वार्षिक लाइसेंस फीस (प्रतिवर्ष 5% वृद्धि के साथ) देनी होगी। साथ ही, 30 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी या एफडी सुरक्षा जमा के रूप में रखनी होगी।

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हिमाचल प्रदेश में लॉटरी का इतिहास प्रतिबंधों से भरा रहा है। वर्ष 1996 में प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगल डिजिट लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद 1999 में प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया। वर्ष 2004 में वीरभद्र सिंह सरकार के दौरान इसे दोबारा शुरू किया गया था, लेकिन बाद में पुनः बंद कर दिया गया। सुक्खू सरकार के नए नियमों के तहत राज्य में प्रतिदिन अधिकतम 12 ड्रॉ और साल में केवल 3 बंपर ड्रॉ ही आयोजित किए जा सकेंगे।

उधर, लॉटरी व्यवस्था को पुनः शुरू करने के फैसले पर प्रदेश में सियासी और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इसका पुरजोर विरोध किया है। इसके अलावा, पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार में सीपीएस रहे और वर्तमान में कांग्रेस से निष्कासित नीरज भारती ने भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर इसे रद्द करने का आग्रह किया है।

राजनीतिक विरोध के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि लॉटरी भाग्य का खेल है और किसी के लिए भी टिकट खरीदना अनिवार्य नहीं है। जिसकी इच्छा होगी, वही इसे खरीदेगा। दूसरी ओर, लॉटरी पर गठित कैबिनेट सब-कमेटी के प्रमुख और कैबिनेट मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि राज्य वित्तीय संकट से गुजर रहा है। पंजाब और केरल जैसे अन्य राज्य भी लॉटरी से राजस्व अर्जित कर रहे हैं, इसलिए सोच-समझकर इसे नियंत्रित तरीके से शुरू करने का फैसला लिया गया है।

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