
आजकल की दुनिया पूरी तरह से डिजिटल हो चुकी है, जहां सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम बस स्क्रीन्स से चिपके रहते हैं। ऐसे में आंखों की प्रॉब्लम्स का बढ़ना तो पक्का है और यही वजह है कि आई केयर इंडस्ट्री में करियर बनाना इस समय सबसे कूल और स्मार्ट चॉइस है।
अगर आप कम उम्र में ही मेडिकल फील्ड में एंट्री मारकर एक हाई-पेइंग और रिस्पेक्टेड जॉब पाना चाहते हैं, तो यह रास्ता आपके लिए एकदम परफेक्ट है। इसमें सिर्फ चश्मे का नंबर चेक करना ही नहीं, बल्कि आंखों की बड़ी सर्जरीज और इलाज में डॉक्टर्स का राइट हैंड बनकर काम करना शामिल है, जो आपको एक अलग लेवल का कॉन्फिडेंस देता है।
इस करियर की शुरुआत करने के लिए आपका 12वीं पास होना जरूरी है, खासकर अगर आपने फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) के साथ पढ़ाई की है तो आपके लिए रास्ते एकदम खुले हैं। हालांकि, कई जगह 50% मार्क्स के साथ पीसीएम (PCM) वाले स्टूडेंट्स को भी मौका मिल जाता है। यह कोर्स केवल 2 साल का है जिसे छोटे-छोटे सेमेस्टर्स में बांटा गया है, ताकि आप थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ज्यादा फोकस कर सकें। सबसे अच्छी बात यह है कि लंबी और बोरिंग पढ़ाई के बजाय, आप सीधे हॉस्पिटल की सेटिंग में असली मरीजों की जांच करना और मॉडर्न मशीनों को हैंडल करना सीखते हैं।
एडमिशन का प्रोसेस भी काफी सीधा है; AIIMS दिल्ली या PGIMER चंडीगढ़ जैसे बड़े सरकारी कॉलेजों के लिए आपको बस एक एंट्रेंस एग्जाम क्रैक करना होता है, जबकि कई बढ़िया प्राइवेट इंस्टिट्यूट्स 12वीं के रिजल्ट के बेस पर आपको डायरेक्ट एडमिशन दे देते हैं। अगर आप उन लोगों में से हैं जो मशीनों के साथ काम करना पसंद करते हैं और जिनके पास पेशेंट्स को प्यार से समझाने का हुनर है, तो आप इस फील्ड के असली रॉकस्टार बन सकते हैं। पढ़ाई के दौरान आपको आंखों की बनावट से लेकर लेंस और दवाइयों की पूरी जानकारी दी जाती है, जिससे आप मात्र दो सालों में एक प्रोफेशनल एक्सपर्ट बनकर बाहर निकलते हैं।
कोर्स पूरा होते ही आपके पास जॉब्स की लाइन लग जाती है क्योंकि हर बड़े हॉस्पिटल, आई क्लीनिक और चश्मा बनाने वाली कंपनियों को ऑप्थेलमिक टेक्नीशियंस की सख्त जरूरत होती है। शुरुआत में ही आप महीने के 15,000 से 25,000 रुपये तक कमाना शुरू कर देते हैं और जैसे-जैसे आपका हाथ मशीनों पर सेट होता है, यह सैलरी 60,000 रुपये महीने के पार भी चली जाती है। अगर आप किसी के अंडर काम नहीं करना चाहते, तो आप खुद की चश्मे की शॉप या विजन सेंटर खोलकर अपने बॉस खुद बन सकते हैं और लाखों में कमाई कर सकते हैं।
आगे चलकर इस फील्ड में स्कोप और भी बढ़िया है क्योंकि आप कॉन्टैक्ट लेंस या लेजर सर्जरी जैसे एडवांस्ड टॉपिक्स में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। भले ही कभी-कभी काम के घंटे थोड़े लंबे हो जाएं या फोकस के कारण आंखों पर थकान महसूस हो, लेकिन जब आप किसी की धुंधली दुनिया को साफ विजन देते हैं, तो वह सेटिस्फेक्शन किसी भी स्ट्रेस से बड़ा होता है। अगर आप एमबीबीएस की लंबी पढ़ाई के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते और जल्दी अपना करियर सेट करना चाहते हैं, तो आज ही इस कोर्स के बारे में सीरियसली सोचें और किसी अच्छे आई हॉस्पिटल जाकर वहां का माहौल जरूर देखें।
