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10वीं के बाद क्यों चुनें DMLT? मेडिकल फील्ड का सुपरफास्ट करियर शॉर्टकट!

Prathakal 2 weeks ago

आजकल की दुनिया में डॉक्टर सिर्फ अंदाजे से इलाज नहीं करते, उन्हें चाहिए सटीक रिपोर्ट्स और यहीं से शुरू होता है एक लैब एक्सपर्ट का स्वैग। अगर आप भी व्हाइट कोट पहनकर मेडिकल फील्ड में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, लेकिन लंबी-चौड़ी डॉक्टरी की पढ़ाई से बचना चाहते हैं, तो यह फील्ड आपके लिए एकदम परफेक्ट वाइब है।

इस समय हेल्थकेयर सेक्टर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए लैब टेक्नीशियन की डिमांड कभी कम नहीं होने वाली। यह एक ऐसी जॉब प्रोफाइल है जहाँ आप पर्दे के पीछे रहकर भी लोगों की जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि बिना आपकी रिपोर्ट के इलाज शुरू ही नहीं हो सकता।

इस धांसू करियर की शुरुआत के लिए आपको 12वीं क्लास कम से कम 45% से 50% मार्क्स के साथ पास करनी होगी। वैसे तो यह कोर्स खास तौर पर साइंस यानी PCB (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) वाले स्टूडेंट्स के लिए बना है, लेकिन कई जगह PCM वाले स्टूडेंट्स को भी चांस मिल जाता है। अगर आप 10वीं के बाद अपना बेस मजबूत कर लेते हैं, तो 12वीं के तुरंत बाद इस दो साल के डिप्लोमा प्रोग्राम में एंट्री ले सकते हैं। इसमें आपको पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और ब्लड एनालिसिस जैसी कूल चीजें सिखाई जाती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और मशीनों के साथ काम करने पर फोकस होता है।

एडमिशन का सीन काफी सिंपल है; कई बड़े सरकारी कॉलेज जैसे AIIMS, CMC वेल्लोर या JIPMER इसके लिए एंट्रेंस एग्जाम लेते हैं, जबकि बहुत से प्राइवेट कॉलेज आपके 12वीं के मार्क्स देखकर सीधा एडमिशन दे देते हैं। बस फॉर्म भरते वक्त यह जरूर चेक कर लें कि कॉलेज का अपना हॉस्पिटल हो ताकि आपको असली वर्क कल्चर का एक्सपीरियंस मिल सके। इस कोर्स की ड्यूरेशन दो साल है, और अगर आप आगे जाकर डिग्री लेना चाहें तो तीन साल का BMLT भी कर सकते हैं। यह कोर्स उन लोगों के लिए बेस्ट है जो बारीक चीजों पर ध्यान देते हैं और जिन्हें टेक्नोलॉजी के साथ काम करना पसंद है।

करियर ऑप्शंस की तो यहाँ लाइन लगी है; आप सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट नर्सिंग होम, बड़े डायग्नोस्टिक सेंटर्स या ब्लड बैंक में अपनी जगह बना सकते हैं। अगर आप खुद का बॉस बनना चाहते हैं, तो जरूरी एक्सपीरियंस और लाइसेंस के बाद अपनी खुद की कलेक्शन लैब भी खोल सकते हैं। इसके अलावा फार्मा कंपनियों और रिसर्च लैब्स में भी लैब मैनेजर्स और क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर्स की काफी जरूरत रहती है। यह एक मंदी-मुक्त करियर है क्योंकि चाहे कुछ भी हो जाए, मेडिकल चेकअप और टेस्ट तो हमेशा होते ही रहेंगे।

अब बात करते हैं उस चीज़ की जिसके लिए हम सब मेहनत करते हैं-सैलरी! एक फ्रेशर के तौर पर आप आराम से ₹15,000 से ₹25,000 प्रति महीने से शुरुआत कर सकते हैं। जैसे-जैसे आपका हाथ साफ होता है और आप मशीनों को हैंडल करने में एक्सपर्ट बन जाते हैं, यह सैलरी ₹40,000 से ₹60,000 तक पहुँच जाती है। अगर आप गल्फ कंट्रीज या यूरोप जैसे देशों का रुख करते हैं, तो वहां कमाई के पैकेज और भी जबरदस्त होते हैं। तो अगर आप कम समय में एक रिस्पेक्टेड और स्टेबल करियर चाहते हैं, तो बिना देर किए इस रास्ते पर निकल पड़िए।

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