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आखिर क्या है UP Assembly Special Session लेने की वजह ? जाने अब तक की पूरी अपडेट

Prathakal 2 weeks ago

UP Assembly Special Session 2026 : उत्तर प्रदेश की विधानसभा आज एक ऐतिहासिक मगर हंगामेदार सत्र की गवाह बनी, जहाँ लोकतंत्र के मंदिर में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चर्चा की शुरुआत से पहले ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त सियासी घमासान देखने को मिला।

सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया जब भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के विधायक हाथों में पोस्टर लेकर वेल में उतर आए। पोस्टर युद्ध और जोरदार नारेबाजी के बीच स्थिति तब और गंभीर हो गई जब दोनों दलों की महिला विधायक एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ी होकर अपनी पार्टी के पक्ष में आवाज बुलंद करने लगीं। हंगामे की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी सीट तक पहुँचने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि महिला विधायकों की नारेबाजी ने उनके मार्ग को अवरुद्ध कर रखा था।

सदन के भीतर मचे इस शोर-शराबे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभालते हुए विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने विपक्षी दलों के आचरण को 'गिरगिट की तरह रंग बदलने' वाला बताते हुए उन पर जन्मजात महिला विरोधी होने का आरोप मढ़ा। सीएम योगी ने ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र करते हुए 1995 के गेस्ट हाउस कांड और बदायूं की घटना का उल्लेख किया और कहा कि समाजवादी पार्टी के उदय के साथ ही प्रदेश में नारी विरोधी प्रवृत्तियां मुखर हुई थीं। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि कैसे भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने अपनी जान पर खेलकर तत्कालीन महिला मुख्यमंत्री मायावती की रक्षा की थी। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से यहाँ तक कह दिया कि विपक्ष के बदलते रंग को देखकर तो गिरगिट भी शरमा जाए।

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण की योजनाओं का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि जनधन योजना के तहत 30 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए और स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया, लेकिन विपक्ष ने हर बार इन योजनाओं का मजाक उड़ाया। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि जब-जब महिलाओं की गरिमा के लिए कदम उठाए गए, तब-तब 'इंडी गठबंधन' ने उसमें रोड़े अटकाए। उन्होंने हाल ही में 16 और 17 अप्रैल को लोकसभा में हुए घटनाक्रम का हवाला देते हुए सपा और कांग्रेस के आचरण को नारी शक्ति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बताया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के लिए नारी सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल ने कहा कि "मैं कई सत्रों से यह देख रही हूँ कि समाजवादी पार्टी, जो विपक्ष में है, के पास कोई मुद्दे ही नहीं हैं; वे पूरी तरह से मुद्दा-विहीन हैं. जहाँ तक उन लोगों की बात है जो कहते हैं कि BJP महिलाओं के बारे में बात नहीं करती, तो मैं कहना चाहूँगी कि समाजवादी पार्टी के नेता खुद ही झूठे हैं। देश की महिलाओं ने खुद देखा है कि किसने हमारे अधिकारों की बात की और किसने उन्हें छीन लिया. वर्षों से, BJP महिलाओं की दबी हुई आवाज़ों को उठाने का काम करती आ रही है."

विपक्ष की ओर से पलटवार करते हुए सपा विधायक संग्राम यादव ने मुख्यमंत्री के संबोधन को 'पुरानी कैसेट' और 'उबाऊ' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि सपा शासनकाल में कन्या विद्या धन जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं के लिए जो काम हुए, सरकार केवल उन्हीं की चर्चा कर रही है। वहीं, सदन की समयावधि को लेकर भी गहमागहमी रही। कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना और सपा की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने चर्चा का समय बढ़ाने पर सहमति जताई ताकि सभी महिला विधायकों को बोलने का अवसर मिल सके। नियम-103 के अंतर्गत प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा ने यह साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब 'आधी आबादी' का मुद्दा सबसे ऊपर है और सरकार इस विशेष सत्र के जरिए विपक्ष के खिलाफ एक कड़ी निंदा प्रस्ताव पारित करने की दिशा में बढ़ रही है।

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