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अकाली दल से दूरी के बाद पंजाब में बड़ा बदलाव ; 2027 चुनाव से पहले केवल सिंह ढिल्लों बने BJP प्रदेश अध्यक्ष

Prathakal 2 weeks ago

पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। 28 मई 2026 को पार्टी नेतृत्व द्वारा किए गए इस ऐलान ने राज्य की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है।

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब में 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

केवल सिंह ढिल्लों ने इस नियुक्ति के साथ सुनील जाखड़ की जगह ली है, जो वर्ष 2023 से पंजाब बीजेपी की कमान संभाल रहे थे। पार्टी के भीतर यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को ध्यान में रखते हुए बीजेपी की एक बड़ी रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

बरनाला जिले के तल्लेवाल गांव से आने वाले केवल सिंह ढिल्लों पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वर्ष 1950 में जन्मे ढिल्लों विशेष रूप से मालवा क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखते हैं, जिसे पंजाब की सत्ता की राजनीति का सबसे अहम इलाका माना जाता है। राज्य की बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें इसी क्षेत्र से आती हैं और चुनावी समीकरण तय करने में इसकी निर्णायक भूमिका रहती है।

ढिल्लों का राजनीतिक सफर कांग्रेस पार्टी से शुरू हुआ था। उन्होंने 2007 से 2017 तक बरनाला से विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रहे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने संगरूर सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें गुरमीत सिंह मीत हेयर के हाथों हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की पंजाब में कमजोर होती स्थिति के बाद उन्होंने जून 2022 में कई पूर्व कांग्रेसी नेताओं के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया था। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें पंजाब बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया और धीरे-धीरे संगठन में उनकी भूमिका मजबूत होती गई।

राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जाता है कि केवल सिंह ढिल्लों की नजदीकियां पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से रही हैं, जिसका लाभ बीजेपी भविष्य की रणनीति में उठाना चाहती है। पार्टी नेतृत्व की नजर अब ऐसे नेताओं पर है जो पंजाब के ग्रामीण और सिख वोट बैंक में प्रभाव रखते हों।

विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी ने ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी पंजाब में अपनी सिख पहुंच को मजबूत करना चाहती है। लंबे समय से बीजेपी पर पंजाब में हिंदू-प्रधान पार्टी होने की छवि का आरोप लगता रहा है। ऐसे में एक प्रमुख सिख चेहरे को संगठन की कमान सौंपना आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि किसान आंदोलन और कृषि कानूनों के विवाद के बाद शिरोमणि अकाली दल के साथ बीजेपी के रिश्तों में दूरी बढ़ गई थी। इसके बाद से बीजेपी लगातार पंजाब में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी अब कांग्रेस और अकाली दल से आए अनुभवी नेताओं के सहारे राज्य में अपने संगठन का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही है। सुनील जाखड़ की तरह केवल सिंह ढिल्लों भी कांग्रेस पृष्ठभूमि से आते हैं। जाखड़ ने भी 2022 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। सूत्रों के अनुसार उनका संगठनात्मक कार्यकाल पूरा होने की ओर था, जिसके चलते नेतृत्व परिवर्तन का फैसला लिया गया।

पंजाब में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों और बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच बीजेपी का यह कदम आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ढिल्लों की नियुक्ति से बीजेपी ग्रामीण सिख मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाने, मालवा क्षेत्र में पकड़ मजबूत करने और राज्य में एक नरम क्षेत्रीय छवि प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि बीजेपी का यह संगठनात्मक दांव पंजाब की जटिल राजनीतिक जमीन पर कितना असर डालता है, लेकिन इतना तय है कि केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं और नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।

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