
असम चुनाव: रैलियों में उमड़ा जनसैलाब, प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर राज्य का किया आह्वान
असम की चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है क्योंकि राज्य की 126 विधानसभा सीटों के लिए आगामी 9 अप्रैल को मतदान होना है.
इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक उत्सव से ठीक पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में विशाल रैलियों को संबोधित किया, जहां जनसमूह का उत्साह देखने लायक था. भारी भीड़ के बीच प्रधानमंत्री ने असम की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्य में एनडीए (NDA) के प्रति मजबूत समर्थन और उत्साहपूर्ण माहौल की सराहना की. यह चुनावी दौरा न केवल भाजपा की शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बना, बल्कि इसने राज्य की राजनीतिक दिशा को एक नया आयाम भी दिया है.
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा शासन के पिछले एक दशक की स्थिरता पर विशेष जोर दिया. उन्होंने जनता को याद दिलाया कि कैसे पिछले दस वर्षों में राज्य ने हिंसा और अस्थिरता के दौर को पीछे छोड़कर विकास की नई परिभाषा लिखी है. प्रधानमंत्री ने 'आत्मनिर्भर असम' का संकल्प दोहराते हुए वादा किया कि आने वाले वर्षों में राज्य आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक सशक्त होगा. उन्होंने स्थानीय संस्कृति और संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया.
विरोधियों पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक केवल झूठे वादे किए और उनके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में भारी खामियां रहीं, जिससे असम का विकास बाधित हुआ. प्रधानमंत्री के अनुसार, विपक्षी दल की नीतियों ने राज्य की सुरक्षा और प्रगति के साथ समझौता किया, जबकि भाजपा ने शांति और सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त किया है. चुनावी रैलियों में उमड़ी इस भीड़ को एनडीए की जीत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की बढ़ती लोकप्रियता के बीच, जिनके नेतृत्व में गठबंधन एक बड़ी जीत की उम्मीद कर रहा है.
हालांकि, चुनावी माहौल के बीच डिजिटल स्पेस में भी हलचल तेज है. जहां एक ओर रैलियों में भारी उपस्थिति की खबरें आ रही हैं, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोग भीड़ के वास्तविक आकार और दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं. इसके बावजूद, जमीन पर चुनावी सर्वेक्षण एनडीए के पक्ष में एकतरफा लहर (landslide) का अनुमान लगा रहे हैं. जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, असम की राजनीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के मुद्दों पर टिक गया है. प्रधानमंत्री की ये रैलियां असम के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णायक मोड़ साबित हो सकती हैं, जो यह तय करेंगी कि राज्य विकास की इस निरंतरता को बरकरार रखता है या नहीं.
