
बारां। आध्यात्मिक चेतना और आत्मिक शुद्धि के प्रतीक जैन समाज के पवित्र नौ दिवसीय ओली पर्व का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। अन्ता विधायक प्रमोद जैन भाया एवं गौत्तम बोरडिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पावन अवधि के दौरान समाज के श्रद्धालुओं ने तप, त्याग, आराधना और संयम के कठिन मार्ग का अनुसरण करते हुए अपूर्व धर्म लाभ अर्जित किया।
पर्व के अंतिम दिन संपूर्ण वातावरण जिनवाणी और भक्ति के स्वरों से गुंजायमान रहा।
समापन के पावन अवसर पर पूज्या अर्चना श्रीजी एवं यषोगुणा श्री जी महाराज साहेब के सान्निध्य में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। महाराज साहेब ने अरिहन्त, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की विधि-विधान से पूजा संपन्न करवाई। इस दौरान नौ लोकस का अवसर, नौ साथिये, नौ मिठाई और नौ प्रदक्षिणा के साथ ओली पर्व की आराधना को पूर्णता प्रदान की गई। अपने मांगलिक प्रवचनों में उन्होंने जैन धर्म के मूल सिद्धांतों-अहिंसा, सत्य और संयम-की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि ओली पर्व वास्तव में आत्मशुद्धि और आत्मिक उन्नति का श्रेष्ठतम माध्यम है, जो प्रत्येक व्यक्ति को संयमित और मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
आयोजन की व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए राजेन्द्र रंगावत और ललित श्रीमाल ने बताया कि समापन पर आराधकों का पारणा अत्यंत उत्साहपूर्वक करवाया गया। इस अवसर पर प्रमोद जैन भाया, यश जैन भाया, पारख कोठारी एवं अशोक बोरडिया परिवारजनों की ओर से सभी आराधकों को रोली, चावल और श्रीफल भेंट कर उनका मंगल अभिनन्दन किया गया। समापन समारोह के दौरान आयोजित विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में तपस्वियों के कठिन तप और त्याग की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उनका भव्य सम्मान किया गया। यह नौ दिवसीय अनुष्ठान समाज में धार्मिक एकता और संयम की नई चेतना जाग्रत करते हुए संपन्न हुआ।
