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बारां में भारत विकास परिषद की माँ अन्नपूर्णा शाखा का गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रम, गुरुजनों व 15 मेधावियों का सम्मान

बारां में भारत विकास परिषद की माँ अन्नपूर्णा शाखा का गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रम, गुरुजनों व 15 मेधावियों का सम्मान

Prathakal 2 weeks ago

स्वीर में बारां के एक राजकीय विद्यालय में भारत विकास परिषद की माँ अन्नपूर्णा शाखा की सदस्याएँ और शिक्षक एक कार्यक्रम के दौरान मंच के पास खड़े नजर आ रहे हैं।

तस्वीर में बारां के एक राजकीय विद्यालय में भारत विकास परिषद की माँ अन्नपूर्णा शाखा की सदस्याएँ और शिक्षक एक कार्यक्रम के दौरान मंच के पास खड़े नजर आ रहे हैं।

बारां में भारत विकास परिषद की माँ अन्नपूर्णा शाखा द्वारा शहर के कोटा रोड स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रम का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करना तथा विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। भारत विकास परिषद की परंपरा का निर्वहन करते हुए कार्यक्रम के प्रारंभ में सामूहिक रूप से 'वंदे मातरम्' गीत का गायन किया गया तथा समापन राष्ट्रगान 'जन गण मन' के सामूहिक गायन के साथ किया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य कुलदीप कुमार शर्मा, उप-प्रधानाचार्य संतोष कुमार जैन, संगीता मीणा, बद्रीलाल मीणा तथा शिक्षक एवं शिक्षिकाओं में निर्मला पिपलानी, शैलेंद्र गुप्ता, सुनील मेहता, रेखा व्यास, यशोदा कश्यप, संजय शर्मा एवं राजेंद्र शर्मा का माला पहनाकर तथा स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के 15 मेधावी विद्यार्थियों का भी अभिनंदन कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन संस्कार संयोजक श्रीमती सपना येवले ने किया।

कार्यक्रम में शाखा की अध्यक्ष मनीषा गोयल, सचिव हेमलता गौतम, कोषाध्यक्ष निधि गेरा, संस्कार संयोजक सपना येवले, रुक्मिणी खत्री, उषा गोयल, पुष्पा बोध, निशा गोयंका, संतोष शर्मा, नेहा चित्तोड़ा, स्नेहलता गौतम, रमा शर्मा, तृप्ति अग्रवाल, उमा नागर एवं उमा बेरीवाल सहित शाखा की सदस्याएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम ने गुरु सम्मान, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और विद्यार्थियों के प्रोत्साहन के उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।

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