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भारत में आई प्रथम हाइड्रोजन-चालित ट्रेन; जानें क्यों है यह खास और कितनी होगी इसकी रफ्तार ?

Prathakal 1 week ago

Hydrogen train in India : भारत में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ परिवहन के क्षेत्र में बुधवार (27 मई) को एक ऐसा ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जो देश के रेल इतिहास को हमेशा के लिए बदल देगा।

भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित 10 डिब्बों की ट्रेन चलाने को हरी झंडी दे दी है। यह महज एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं, बल्कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को खत्म करने और भविष्य की 'हरित ऊर्जा' की तरफ भारत का एक बेहद साहसिक और क्रांतिकारी कदम है। 1,200 किलोवाट की अत्याधुनिक हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रणोदन प्रणाली से लैस यह ट्रेन जब पटरियों पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी, तो भारतीय इंजीनियरिंग का लोहा पूरी दुनिया मानेगी।

इस बड़ी कामयाबी के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा और महाशक्तिशाली देशों के एलीट क्लब में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन ऊर्जा की असीम संभावनाओं को हकीकत में बदल रहे हैं। अब तक जर्मनी, जापान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश ही इस तकनीक पर काम कर रहे थे, लेकिन अब भारतीय रेलवे ने इस क्लब में अपनी धमक दर्ज करा दी है। रेलवे द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में साफ कहा गया है कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना सिर्फ एक प्रयोग नहीं है, बल्कि यह नवाचार, ऊर्जा दक्षता और शून्य कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति भारतीय रेलवे की अटूट प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

आमतौर पर डीजल इंजन भारी मात्रा में कार्बन और जहरीला धुआं उगलते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। हालांकि, भारतीय रेलवे ने पहले ही अपने लगभग 100 प्रतिशत नेटवर्क का विद्युतीकरण करके कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर ला दिया है, लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के साथ रेलवे अब खुद बिजली उत्पन्न करने की दिशा में आत्मनिर्भर बन रहा है। इस ट्रेन में इस्तेमाल होने वाली 'हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक' एक रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से काम करती है। जब हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिलन होता है, तो बड़े पैमाने पर बिजली पैदा होती है और इस पूरी प्रक्रिया के बाद सह-उत्पाद (By-product) के रूप में केवल जल वाष्प यानी पानी की भाप ही बाहर निकलती है। पारंपरिक ईंधनों का यह सबसे सुरक्षित और शत-प्रतिशत स्वच्छ विकल्प है।

इस ऐतिहासिक संचालन को सुचारू रूप से चलाने के लिए हरियाणा के जींद में एक अत्याधुनिक स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने (रिफ्यूलिंग) की विशेष सुविधा स्थापित की गई है। इस संवेदनशील और उच्च-तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने सभी आवश्यक और कड़े वैधानिक अनुमोदन प्रदान कर दिए हैं। चूंकि यह तकनीक भारत के लिए बिल्कुल नई है, इसलिए शुरुआती परिचालन के दौरान किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी हर वक्त ट्रेन के भीतर मौजूद रहेंगे।

सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम और कड़े प्रोटोकॉल :

हाइड्रोजन ईंधन अत्यधिक ज्वलनशील और संवेदनशील होता है, इसलिए भारतीय रेलवे ने सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, इस ट्रेन के संचालन के लिए एक बेहद कड़ा सुरक्षा और परिचालन प्रोटोकॉल अनिवार्य किया गया है:

  • 24x7 निरंतर निगरानी : हाइड्रोजन ईंधन भरने और भंडारण की पूरी प्रणाली की चौबीसों घंटे लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी।
  • सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स की तैनाती : इस पूरे प्रोजेक्ट के महत्वपूर्ण और संवेदनशील ऑपरेशन्स के लिए केवल विशेष रूप से प्रशिक्षित और प्रमाणित कर्मियों को ही तैनात किया जाएगा।
  • एडवांस्ड सेफ्टी सेंसर्स : किसी भी अनहोनी से बचने के लिए पूरे प्लांट और वितरण केंद्र में अत्याधुनिक हाइड्रोजन रिसाव डिटेक्टर (Leakage Detectors) और फ्लेम डिटेक्टर (Flame Detectors) लगाए गए हैं।
  • सख्त मेंटेनेंस शेड्यूल : धूल और अन्य कणों को जमा होने से रोकने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की नियमित सफाई और कड़े तकनीकी निरीक्षण का एक सख्त टाइमटेबल तैयार किया गया है।

सड़क से लेकर पटरी तक हाइड्रोजन क्रांति की गूंज :

भारत सरकार देश के पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को हाइड्रोजन आधारित बनाने के लिए बेहद आक्रामक और गंभीर रुख अपनाए हुए है। पटरी पर इस ट्रेन की मंजूरी से ठीक कुछ दिन पहले देश की राजधानी में भी एक ऐसा ही बड़ा चमत्कार देखा गया था। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने नई दिल्ली के हाई-प्रोफाइल सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित शटल बस सेवा की शुरुआत की है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा डीडीआरसी को प्रदान की गई ये दो विशेष बसें, जिनमें प्रत्येक में 35 यात्रियों के बैठने की क्षमता है, हाई-टेक सुरक्षा उपकरणों से लैस हैं। इन बसों में सुरक्षित सफर और रूट मॉनिटरिंग के लिए रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग और अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सड़क पर दौड़ती बसों से लेकर पटरियों पर दौड़ने को तैयार इस 10 कोच वाली दुनिया की सबसे लंबी ब्रॉडगेज हाइड्रोजन ट्रेन तक, भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह भविष्य की हरित ऊर्जा का नया वैश्विक लीडर बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prathakal